उत्तरप्रदेश

यमुना हादसे में 13 लोगों की मौत, बस का शीशा तोड़कर दोनों बच्चों को बाहर निकाला, खुद नहीं निकल पाई पार्वती

शवों को पहचानना हुआ मुश्किल, 17 बैग में लाए गए कंकाल और जले हुए टुकड़े

मथुरामथुरा के बलदेव में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के हुए हादसे के बाद का मंजर डरावना है। घने कोहरे में एक के बाद एक टकराने से सात बसों और तीन कारों में लगी भीषण आग ने जमकर तबाही मचाई। अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई लाशें इस कदर जली हुई हैं कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल है। हादसे में एक मां ने अपने दोनों बच्चों को तो बचा लिया, लेकिन खुद की जान नहीं बचा सकी। परिवार के लोग हादसे की जानकारी के बाद पहुंचे। उसकी लाश भी अब घरवालों को नहीं मिल रही है।

पार्वती के देवर गुलज़ारी ने बताया कि पार्वती के गले में कांच टूटकर फंस गया और वह उसी बस में रह गई थी। उन्हें जब इस हादसे की जानकारी हुई तो सीधे हमीरपुर से पार्वती को खोजते हुए फिर रहे हैं। गुलज़ारी ने बताया कि उन्हें पार्वती न तो जिला अस्पताल में मिली है और न ही वृंदावन वाले अस्पताल में अब वह उसे खीजते हुए पोस्टमार्टम हाउस आए हैं।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें आश्वासन दे रहे हैं। मगर पार्वती के दोनों बच्चे और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने  सब कुछ बर्बाद कर दिया।
सात बसों और तीन कारों में लगी आग इतनी भयानक थी कि कई लोगों को तो बचने का मौका ही नहीं मिला। दमकल की गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया। हादसे के बाद बसों से कंकाल, खोपड़ियां और अधजली लाशें निकालीं गईं, तो देखने वालों का कलेजा कांप गया। आग इतनी भयानक थी कि एक्सप्रेस-वे पर सफेद पट्टी तक पूरी तरह पिघल कर मिट गई। कई लाश बसों की सीटों पर चिपकी हुईं मिलीं। पुलिस ने इन लाशों को बसों से बाहर निकाला। इनको 17 बैग में रखकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया गया है। 

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