रिवर्स पलायन के लिए चिंताजनक-पर्वतीय जिलों में 20 हजार हे. भूमि बंजर में तब्दील

रिवर्स पलायन के लिए चिंताजनक-पर्वतीय जिलों में 20 हजार हे. भूमि बंजर में तब्दील

उत्तराखंड विधानसभा चिंताजनक- पर्वतीय जिलों में 20 हजार हे. भूमि बंजर में तब्दील।

*19680 बेरोजगारों को मिला रोजगार, 839697 पजीकृत बेरोजगार

*बेरोजगारी दर में 2.9 प्रतिशत की गिरावट।

देहरादून। विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने शुक्रवार को सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर में भारी कमी आयी है। रोजगार मेलों के जरिये 19680 बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराए गए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में 20622 हे. (4.30 प्रतिशत) भूमि बंजर तथा अन्य वृक्षों, झाड़ियों आदि में परिवर्तित हुई है। आंगनबाड़ी के कई कार्यालय किराए के भवन में चल रहे हैं।

प्रश्नकाल के दौरान कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, धन सिंह रावत गणेश जोशी, रेखा आर्य ने विपक्षी विधायकों प्रीतम सिंह,ममता राकेश, व भाजपा विधायक डॉ मोहन बिष्ट महेश जीना के सवालों के जवाब दिए। विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली, खजानदास ने भी अपनी सरकार के मंत्रियों से सवाल जवाब किये।

मंत्री सौरभ बहुगुणा ने एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकारी सेवाओं में सीमित अवसरों के दृष्टिगत विभाग द्वारा निजी क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से युवाओं को जोड़े जाने के उद्देश्य से रोजगार मेले/ प्लेसमेन्ट ड्राइव का आयोजन किया जाता है। नियोजकों के द्वारा रोजगार मेलों के माध्यम से 19,680 बेरोजगार युवाओं को चयनित कर रोजगार / प्रशिक्षणोपरान्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये है।

भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा निर्गत अक्टूबर से दिसम्बर 2021 के त्रैमासिक आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में बेरोजगारी दर 15.5 प्रतिशत है, जुलाई से सितम्बर 2021 के त्रैमास में यह दर 17.4 प्रतिशत थी तथा अप्रैल से जून 2021 के त्रैमास यह दर 17.0 प्रतिशत थी। सी०एम० आई०ई० द्वारा जारी रिपोर्ट में राज्य की बेरोजगारी गिरावट दर्ज की गई है तथा मई-2022 हेतु जारी आंकड़ों के अनुसार यह दर 2.9 प्रतिशत है। इस प्रकार राज्य में बेरोजगारी की दर में भारी कमी आयी है।

कौशल विकास व पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा
राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु अधियाचन विभिन्न चयन आयोगों को प्रेषित किये गये है जिन पर कार्यवाही निरन्तर की जा रही है। सरकारी सेवाओं में रोजगार के सीमित अवसर के दृष्टिगत, राज्य सरकार द्वारा राज्य के युवाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाये जाने तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने हेतु विभिन्न योजनायें संचालित की जा रही है। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अन्तर्गत आई०टी०आई० लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योगों की तात्कालिक मांग के अनुसार कुशल कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कार्यवाही की जा रही है तथा अप्रेन्टिसशिप मेले एवं रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों द्वारा युवाओं हेतु रोजगार / स्वरोजगारपरक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे योजना,वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना, पिरूल एवं बायोगैस योजना, उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बकरी पालन योजना, भेड़ पालन योजना, गंगा गाय महिला डेरी विकास योजना, महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार योजना, महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना, स्टार्टअप एण्ड स्टैण्डअप उद्यमिता विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, शहरी गरीब परिवारों हेतु डी.एन.यू.एल.एम. योजना । आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक पैकेज देने के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनायें संचालित की जा रही है। उपरोक्त सभी योजनाओं का उद्देश्य राज्य के युवाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना तथा स्वरोजगार के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराया जाना है।

पर्वतीय क्षेत्रों में बंजर होती जा रही भूमि*

मंत्री गणेश जोशी ने सदन में बताया कि राजस्व आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000-01 के भूमि उपयोगिता के आंकड़ों के आधार पर पर्वतीय क्षेत्रों में 517628 हे0 कृषि तथा परती भूमि थी, जो कि वर्ष 2020-21 में घटकर 479270 हे0 हो गई है। इस प्रकार पर्वतीय क्षेत्रों में 38358 हे० भूमि की कमी हुई है। जिसमें से 17736 हे० भूमि कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोग में लाई जा रही है तथा 20622 हे0 (4.30 प्रतिशत) भूमि बंजर तथा अन्य वृक्षों, झाड़ियों आदि में परिवर्तित हुई है।

पर्वतीय क्षेत्र की बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिये रेखीय विभागों यथा जलागम विभाग द्वारा उत्तराखण्ड विकेन्द्रीकृत जलागम विकास योजना उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड द्वारा चाय विकास परियोजना सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई, देहरादून के द्वारा संचालित सगन्ध पौध विकास कार्यक्रम के माध्यम से परती / बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

जलागम विभाग, चाय विकास बोर्ड एवं सगन्ध पौधा केन्द्र मे संचालित विभिन्न केन्द्र एवं राज्य पोषित योजनाओं के माध्यम से बंजर भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

पर्वतीय क्षेत्र की बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिये उत्तराखण्ड विकेन्द्रीकृत जलागम विकास योजना के अन्तर्गत किये जा रहे कार्यक्रमों से 2530 हे0 परती/ बंजर भूमि तथा ग्राम्य विकास की एकीकृत अजीविका सहयोग परियोजना के अन्तर्गत 271 हे0 परती भूमि पुनः कृषि कार्यो के उपयोग में आ गयी है । चाय विकास परियोजना के अन्तर्गत 1429.77 हे0 बंजर भूमि पर चाय बागान विकसित किये गये है। सगन्ध पौध विकास कार्यक्रम के माध्यम से 473 हेक्टेयर बंजर भूमि में लेमन ग्रास की खेती की जा रही है। इस प्रकार वर्तमान में कुल-4703.77 हे0 परती / बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत
एक सवाल के जवाब में डॉ धनसिंह रावत ने बताया कि प्रदेश अन्तर्गत संचालित दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों द्वारा 6.5 प्रतिशत वसा एवं 09.00 प्रतिशत वसा रहित ठोस पदार्थ पर दूध का क्रय मूल्य निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में प्रदेश के दुग्ध संघों द्वारा दूध का क्रय मूल्य उक्त वसा एवं वसा रहित ठोस पदार्थ की मानक दरों पर रू0 36 से रू0 42 प्रति किलोग्राम निर्धारित करते हुए दुग्ध समितियों से दूध क्रय किया जा रहा है। दुग्ध संघ द्वारा दुग्ध समितियों के माध्यम से प्राप्त दूध को प्रसंस्करण कर विभिन्न प्रकार के तरल दूध यथा स्किम्ड मिल्क, डबल टोण्ड मिल्क, टोण्ड मिल्क, स्टैण्डर्ड मिल्क एवं फुल क्रीम मिल्क आदि तैयार किये जाते हैं जिनकी, विक्रय दर दूध में उपलब्ध वसा एवं वसा रहित ठोस पदार्थ के आधार पर तय की जाती है। वर्तमान में दुग्ध संघों द्वारा उक्त विभिन्न तरल दूध की विक्रय दर निम्नानुसार है :

तरल दूध विक्रय दर रू०

स्किम्ड मिल्क ,34 से 40 डबल टोण्ड मिल्क 42 से 44

टोंड मिल्क – 46 से 50

स्टैण्डर्ड मिल्क – 54 से 58

4.full क्रीम milk- 60-62

दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध उपार्जन परिवहन, प्रसंस्करण एवं विपणन पर हुए व्यय तथा लाभ को सम्मिलित करते हुए दूध की विक्रय दरों का निर्धारण किया जाता है। वर्तमान में दुग्ध मूल्य वृद्धि करने हेतु फिलहाल कोई विचार नही है।

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