उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

नमामि भारतम् के तहत हरिद्वार में गूंजा वंदे मातरम्

हरिद्वार (अमित शर्मा)। वंदे मातरम् की रचना के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर ‘नमामि भारतम् – एक समय, एक लय, एक स्वर’ अभियान के तहत शुक्रवार को हरिद्वार के सरस्वती विद्या मंदिर मायापुर एव बीएचईएल सेक्टर-2 में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक सामूहिक गायन का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों कंठों से निकले राष्ट्रगीत के स्वर से पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा।


सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मायापुर में सुबह ठीक 11 बजे आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उछाली आश्रम, हरिद्वार के परमाध्यक्ष विष्णुदास महाराज के पावन सानिध्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम जी के मुख्य उद्बोधन में सामूहिक गायन संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में विद्या भारती उत्तराखंड के प्रदेश निरीक्षक डॉ. विजयपाल सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष जगपाल सिंह, प्रबंधक डॉ. कपिल गोयल, कोषाध्यक्ष प्रभुदयाल अग्रवाल, सदस्य रमेश भाटिया, प्रकाश जोशी, इंडियन बैंक हरिद्वार के शाखा प्रबंधक दीपक कुमार रस्तोगी, विद्या भारती के प्रांत प्रमुख हेमराज सिंह, शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य करणेश सैनी और प्रधानाचार्य अजय सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। जैसे ही विद्यालय के विद्यार्थियों और आचार्यों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन शुरू किया, पूरा वातावरण गौरव और राष्ट्रप्रेम की अनुभूति से भर गया।

मुख्य वक्ता पदम ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना का गान है। यह मातृभूमि के प्रति गौरव और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में देशभर में 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों ने एक समय पर वंदे मातरम् गाया।

उत्तराखंड में ही 552 स्थानों पर लगभग दो लाख लोगों ने इसमें भागीदारी की। उन्होंने कहा कि भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद एक साथ गूंजता वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता का विराट दृश्य प्रस्तुत करता है।

प्रदेश निरीक्षक डॉ. विजयपाल सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश की गौरवशाली परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। इस ऐतिहासिक सामूहिक गायन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने के लिए प्रमाणन की प्रक्रिया भी की जा रही है।

वहीं सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल रानीपुर में भी भव्य और ऐतिहासिक आयोजन हुआ। यहां कुल 3930 लोगों ने सहभागिता की, जिनमें 2773 छात्र-छात्राएं, 981 अभिभावक, 161 शिक्षक-शिक्षिकाएं और 15 अतिथिगण शामिल रहे। छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों और अभिभावकों का एक साथ खड़े होकर गायन करना अपने आप में रोमांचकारी अनुभव रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी जी महाराज, विद्या भारती उत्तराखंड के मंत्री डॉ. रजनीकांत शुक्ल, संघ के विभाग प्रचारक राकेश जी, पूर्व भेल नगर प्रशासक संजय पवार, जिला संघ चालक डॉ. यतीन्द्र नागियान और पार्षद अनुज सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और वंदना के साथ किया गया। अतिथि परिचय शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य कमल सिंह रावत ने कराया।

डॉ. रजनीकांत शुक्ल ने वंदे मातरम् के 150 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान को जागृत किया। आचार्य कमलेश जी द्वारा प्रस्तुत एकल गीत ने सभी को भावविभोर कर दिया।

संघ के विभाग प्रचारक राकेश जी ने कहा कि वंदे मातरम् मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव है, जो व्यवहार में भी दिखना चाहिए। मुख्य अतिथि श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि हजारों बच्चों का एक साथ गायन भारत की एकता का अद्भुत दृश्य है और यही संस्कार आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र से जोड़ता है। सत्यापन अधिकारी संजय पवार ने पूरे आयोजन का सत्यापन किया।

सरस्वती विद्या मंदिर बीएचईएल के प्रधानाचार्य लोकेंद्र अंथवाल और मायापुर के प्रधानाचार्य अजय सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव को मजबूत करते हैं।

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