Gen z के गुस्से को शांत करने के लिए आरएसएस ने चुनी संवाद की राह !
गुरुवार को मुंबई में मोहन भागवत लेंगे जेन जी की बैठक

दो दिन पूर्व भागवत व मुरली मनोहर जोशी मिल चुके हैं युवाओं से
इधर दिल्ली में आज उत्तराखंड भाजपा कोर कमेटी की बैठक लेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने gen जी के गुस्से को शांत करने के लिए संवाद की राह चुनी है। गुरुवार 6 अगस्त को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुंबई में ‘जेन-जी’ (Gen Z) और ‘जेन-अल्फा’ के साथ एक विशेष संवाद सत्र को संबोधित करेंगे। विशेष सत्र का आयोजन ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशंस’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में किया जा रहा है। यह सत्र मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में होगा।
सूत्रों की जानकारी है कि इस कार्यक्रम में देश भर के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष की आयु के 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे।हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर पर घटित घटनाक्रम के बाद आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के साथ इस संवाद के पीछे गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं, जिन्हें देश के मौजूदा घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है।

पेपर लीक विवाद और युवा असंतोष को शांत करना, हाल ही में नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में भारी छात्र आंदोलन हुए, जिसके दबाव में आकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) व अन्य संगठनों ने इस आंदोलन के जरिए युवाओं के बीच मजबूत पकड़ बनाई है। इस माहौल में, आरएसएस प्रमुख का सीधे युवाओं के बीच जाना इस छात्र असंतोष को थामने और डैमेज कंट्रोल की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
मोहन भागवत ने हाल ही में कहा था कि “नयी पीढ़ी सवाल पूछती है, उन्हें केवल आदेश देने के बजाय प्यार से तर्क समझाना होगा।” संघ यह समझ चुका है कि पारंपरिक और रूढ़िवादी भाषा आज के डिजिटल और सोशल मीडिया युग के युवाओं को प्रभावित नहीं कर सकती इसलिए, वे अब ‘निर्देश’ (directives) देने के बजाय ‘संवाद और आम सहमति’ (dialogue and consensus) का रास्ता अपना रहे हैं, ताकि युवाओं के बीच संघ की एक आधुनिक और सुलभ छवि (accessible image) बनाई जा सके।
भागवत जानते है कि ‘जेन-जी’ (15-19 वर्ष के युवा) आगामी चुनावों में देश के नए और सबसे निर्णायक मतदाता (First-time Voters) बनने जा रहे हैं। सोशल मीडिया और आंदोलनों के कारण यह पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से अलग सोच रही है। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंस्टाग्राम रील्स और युवाओं से सीधे संवाद के जरिए इस पीढ़ी से जुड़ रहे हैं, उसी तरह संघ भी अपने सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभाव को अगली पीढ़ी में ट्रांसफर करना चाहता है।
विपक्ष लगातार संघ और भाजपा पर ‘युवा विरोधी’ होने और रोजगार तथा परीक्षाओं में पारदर्शिता न रख पाने के आरोप लगा रहा है। इस सम्मेलन के जरिए संघ युवाओं के सामने परीक्षा पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता (civic engagement) जैसे मुद्दों पर चर्चा कर यह दिखाना चाहता है कि वह युवाओं की समस्याओं के प्रति गंभीर है, जिससे विपक्षी विमर्श (opposition narrative) को कमजोर किया जा सके। संघ इस कार्यक्रम को किसी राजनीतिक लाभ के तौर पर नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ (The Indian Way) के रूप में पेश कर रहा है। युवाओं को कूटनीति, वैश्विक मामलों और भारतीय नजरिए (Bharatiya perspective) से जोड़कर संघ युवाओं के भीतर एक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को गहरा करना चाहता है, जिसका सीधा फायदा अंततः उनके वैचारिक और राजनीतिक एजेंडे को ही मिलेगा।
इस सत्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं के साथ जुड़ना और राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व तथा दुनिया को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा करना है।मोहन भागवत द्वारा ‘जेन-जी’ (Gen Z) की मानसिकता और स्वभाव को लेकर हाल ही में दिए गए बयानों के बाद इस संवाद को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। .




