महाराष्ट्र में फडणवीस नहीं शिंदे बनेंगे नए मुख्यमंत्री, शपथ समारोह आज शाम 7.30 बजे 

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद गुरुवार को राजनीतिक तस्वीर काफी साफ हो गई है। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया। फडणवीस के इस एलान से पहले हर कोई कयास लगा रहा था कि वे ही मुख्यमंत्री पद ग्रहण करेंगे और उपमुख्यमंत्री पद एकनाथ शिंदे को सौंपेंगे। इस बीच हम आपको वह वजह भी बता रहे हैं, जिसके चलते भाजपा ने बागी विधायकों के गुट को समर्थन देते हुए एकनाथ शिंदे को शीर्ष पद सौंपने का फैसला किया। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में घोषणा की कि एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे। शपथ समारोह आज शाम 7.30 बजे होगा।
क्यों भाजपा ने मुख्यमंत्री पद शिंदे को सौंपा?
2019 के चुनाव के बाद जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकी तो पार्टी ने राकांपा से बगावत करने वाले अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला किया। हालांकि, भाजपा की यह तरकीब फेल हो गई थी। ऐसे में इस बार पहले से ही एकनाथ शिंदे के हाथ में पूरी लगाम दिखाई दी। भाजपा भी लंबे समय तक सत्ता से बाहर रही है, इसलिए पद पर उसका दावा कमजोर रहा है।
चूंकि एकनाथ शिंदे जानते थे कि सरकार बनाने की चाभी उनके पास थी। इसलिए भाजपा ने भी उनसे ज्यादा तोलमोल नहीं किया। इतना ही नहीं खुद भाजपा ऑपरेशन लोटस के जरिए इस सरकार को गिराने का कलंक अपने सिर नहीं लेना चाहती थी। फडणवीस का मत रहा है कि भाजपा अगर खुद चुनाव जीतकर आती तो ही वे सीएम बनते। ऐसे में शिंदे गुट का पलड़ा भारी रहने की वजह से उद्धव ने यह पद शिंदो को सौंप दिया।
शिंदे बोले, फडणवीस करते रहेंगे मार्गदर्शन
महाराष्ट्र के मनोनीत सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा- भाजपा के पास 120 विधायक हैं लेकिन उसके बावजूद देवेंद्र फडणवीस ने सीएम का पद नहीं संभाला। मैं पीएम मोदी, अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं के साथ उनका आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने उदारता दिखाई और बालासाहेब के सैनिक (पार्टी कार्यकर्ता) को राज्य का सीएम बनाया। फडणवीस भले ही सरकार से बाहर रहेंगे लेकिन हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।
मैं सरकार से बाहर रहूंगा: फडणवीस
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान फडणवीस ने कहा कि एक तरफ शिवसेना ने दाऊद इब्राहिम का विरोध किया और दूसरी तरफ उन्होंने एक ऐसे शख्स को कैबिनेट में रखा जो दाऊद की मदद करने के आरोप में जेल गया था। वे सावरकर का अपमान करने वाले के साथ गठबंधन में थे। 2019 में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन हुआ था और हमें विधानसभा चुनावों में आवश्यक संख्या मिली थी। हमें सरकार बनाने की उम्मीद थी, लेकिन शिवसेना ने उन लोगों के साथ गठबंधन करना चुना जिनके खिलाफ बालासाहेब ने जीवन भर विरोध किया।




