पिछौड़ा फैशन नहीं, कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान

कुमांचल सांस्कृतिक कल्याण परिषद ने सांस्कृतिक पहचान से खिलवाड़ पर जताई चिंता
देहरादून। कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपरा का प्रतीक पिछौड़ा आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विवाह समारोहों से लेकर विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक महिलाएं पिछौड़ा धारण कर रही हैं। हालांकि, इसके बढ़ते चलन के बीच इसके पारंपरिक स्वरूप और सांस्कृतिक गरिमा को लेकर कुमांचल सांस्कृतिक कल्याण परिषद ने चिंता जताई है।
बृहस्पतिवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछौड़ा महज एक परिधान नहीं, बल्कि कुमाऊं की पहचान, आस्था, परंपरा और नारी सम्मान से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर है। इसलिए इसे केवल फैशन या दिखावे के लिए पहनने के बजाय इसके महत्व और परंपरागत तरीके को समझना जरूरी है। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि आजकल कई आयोजनों में महिलाएं पिछौड़ा धारण तो करती हैं, लेकिन कई बार इसे पारंपरिक तरीके से नहीं पहना जाता। कहीं पिछौड़ा जमीन पर पैर के नीचे आ जाता है तो कहीं इसे केवल औपचारिकता या फैशन के तौर पर धारण किया जाता है। कुछ आयोजनों में पिछौड़े को एक तरफ लटकाकर रखने की प्रवृत्ति भी दिखाई देती है। परिषद ने कहा कि इससे इस पारंपरिक परिधान की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने परिषद कहा कि कुमाऊं की परंपरा में पिछौड़ा हर अवसर पर पहनने का परिधान नहीं रहा है। विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्यक्रमों, नामकरण संस्कार, जनेऊ, पूजा-पाठ, दीपावली, हरेला, शिव आराधना सहित विभिन्न धार्मिक और पारंपरिक अवसरों पर पिछौड़ा धारण करने की परंपरा रही है।परिषद ने होली के अवसर पर पिछौड़ा न पहनने की पारंपरिक वजह भी बताई। कुमाऊं में होली के दौरान कच्चे रंगों का प्रयोग और बाद में छरड़ी/छलड़ी पर रंगों को धोने की परंपरा रही है। वहीं पिछौड़े में पक्के रंगों का प्रयोग होने के कारण पारंपरिक रूप से होली के दौरान इसे धारण नहीं किया जाता था। परिषद का कहना है कि ऐसी परंपराओं के पीछे छिपे सांस्कृतिक और व्यावहारिक कारणों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। परिषद ने नई पीढ़ी से अपील की कि वह पिछौड़े को केवल फैशन के रूप में न देखे, बल्कि इसे अपनी जड़ों और विरासत की पहचान के रूप में समझे। पत्रकार वार्ता में परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, महासचिव गोविन्द पांडेय, सांस्कृतिक सचिव बबीता साह लोहानी, भारती पांडेय, अमिता प्रेमा तिवारी, शान्ति देवी, कमला पंत, उमा गोमायाल और मंजू देऊपा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।



