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उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: सचिवालय सेवा के 26 PCS अधिकारियों के तबादले, 6 IAS का कार्यभार बदला

देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने शुक्रवार देर शाम एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 6 आईएएस और 26 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शासन द्वारा जारी आदेश में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों से उनके वर्तमान प्रभार वापस ले लिए गए हैं।

अधिकारियों से छीनी गई जिम्मेदारियां

इस फेरबदल के तहत आईएएस आनंद स्वरूप से आयुक्त खाद्य विभाग का दायित्व वापस ले लिया गया है। वहीं आईएएस रुचि मोहन रयाल को आयुक्त नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के पद से हटाया गया है। इन बदलावों को विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार के उद्देश्य से लिया गया निर्णय बताया जा रहा है।

खाद्य विभाग में नई कमान

आईएएस प्रकाश चंद्र को संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड के पद से मुक्त कर दिया गया है। उनके स्थान पर आईएएस बंसीलाल राणा को खाद्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन को उम्मीद है कि नई नियुक्ति से विभाग में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

महिला अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

प्रशासनिक फेरबदल में युवा और महिला अधिकारियों को भी प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई हैं। आईएएस गौरी प्रभात को संयुक्त मजिस्ट्रेट, पौड़ी गढ़वाल बनाया गया है, जबकि आईएएस दीक्षिता जोशी को संयुक्त मजिस्ट्रेट, रानीखेत नियुक्त किया गया है। इससे प्रशासन में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण आने की संभावना जताई जा रही है।

पीसीएस अधिकारियों का बड़े स्तर पर तबादला

आईएएस के साथ-साथ 26 पीसीएस अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं। यह बदलाव विभिन्न जिलों और विभागों में प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

कुमाऊं-गढ़वाल में बदलाव की बयार

डॉ. लक्ष्मी प्रसाद को अपर आयुक्त (गढ़वाल) से हटाकर अपर आयुक्त (कुमाऊं) बनाया गया है। वहीं नरेंद्र सिंह को आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला के रजिस्ट्रार पद से हटाकर उन्हें अपर आबकारी आयुक्त के पद पर यथावत रखा गया है।

शासन और आयोगों में नई तैनाती

शिवकुमार बर्नवाल को सेवा चयन आयोग के सचिव पद से हटाकर उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलसचिव बनाया गया है। प्रकाश चंद्र दुमका को अतिरिक्त जिम्मेदारियों के साथ संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि नंदन सिंह डूंगरियाल को सेवा चयन आयोग में सचिव बनाया गया है।

जिलों में प्रशासनिक फेरबदल

अवधेश कुमार सिंह को टिहरी से हटाकर शहरी विकास निदेशालय भेजा गया है। शैलेन्द्र सिंह को नैनीताल से टिहरी गढ़वाल, जबकि वैभव गुप्ता को देहरादून से हरिद्वार में अपर जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

हरिद्वार-नैनीताल में अदला-बदली

सौरभ असवाल को हरिद्वार से नैनीताल भेजा गया है। वहीं मनीष कुमार सिंह को हरिद्वार के डिप्टी कलेक्टर पद से हटाकर उनके पास केवल रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव का अतिरिक्त प्रभार रखा गया है।

सूचना आयोग और निगमों में बदलाव

संतोष कुमार पाण्डेय को नगर निगम देहरादून से हटाकर उपसचिव सूचना आयोग बनाया गया है। लक्ष्मीराज चौहान को गढ़वाल मंडल विकास निगम से हटाकर सेवा चयन आयोग में परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी दी गई है।

अन्य जिलों में बड़े स्तर पर तबादले

कुसुम चौहान को हरिद्वार से जीएमवीएन देहरादून भेजा गया है। हरि गिरि को देहरादून से हरिद्वार, अनुराग आर्य को चंपावत से नैनीताल, और रविंद्र कुमार जुवांठा को ऊधमसिंह नगर से देहरादून स्थानांतरित किया गया है।

डिप्टी कलेक्टर स्तर पर बदलाव

सुधीर कुमार को प्रशासनिक अकादमी से हटाकर नैनीताल में डिप्टी कलेक्टर बनाया गया है। हिमांशु कफ्लटिया को सेवा चयन आयोग से हटाकर ऊधमसिंह नगर में डिप्टी कलेक्टर नियुक्त किया गया है।

पहाड़ी जिलों में नई तैनाती

प्रेम लाल को देहरादून से उत्तरकाशी, यशवीर सिंह को पिथौरागढ़ से चमोली, और मुकेश चंद्र रमोला को उत्तरकाशी से देहरादून भेजा गया है।

कई जिलों में क्रॉस पोस्टिंग

विनीत चंद्र पंत को नैनीताल से चंपावत, सुनील कुमार को अल्मोड़ा से चंपावत, पंकज भट्ट को चमोली से टिहरी गढ़वाल और अल्केश नौडियाल को टिहरी से चमोली स्थानांतरित किया गया है।

अंतिम चरण में बड़े बदलाव

कृष्णा त्रिपाठी को पौड़ी से रुद्रप्रयाग और आशीष राज को टिहरी से पिथौरागढ़ भेजा गया है। इन सभी बदलावों को राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से जोड़ा जा रहा है।

सरकार की मंशा साफ

सरकार का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही, आगामी विकास योजनाओं और प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

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