उत्तराखण्ड

सात दिवसीय पंचकर्म कार्यशाला के पांचवें दिन दी गई प्राकृतिक चिकित्सा की जानकारी

बहादराबाद/हरिद्वार, (बी बी चंदेला )। 7 दिवसीय पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला के पांचवें दिन प्रतिभागियों को विभिन्न उपचार पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डॉ० मनोज कुमार, निदेशक, श्री संजीवनी क्रिया योग ऋषिकुल हरिद्वार द्वारा सैद्धांतिक एवं प्रयोगात्मक रूप से बस्ती, अग्निकर्म, अभ्यंग और शिरोधारा जैसी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।

दिल्ली से आईं कुमारी ऋतुत्या त्यागी ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के नियमों का पालन करने से असाध्य रोगों में भी लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति दिनचर्या एवं ऋतुचर्या के अनुसार जीवनशैली अपनाए, तो शरीर स्वतः शुद्ध होकर निरोगी बन सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा पंचमहाभूत—आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी पर आधारित होती है, जो शरीर के तत्वों को संतुलित करने का कार्य करती है। इस दौरान मिट्टी चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा और जल चिकित्सा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि इन प्राकृतिक तत्वों में मौजूद गुण शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष प्रो० लक्ष्मीनारायण जोशी ने विद्यार्थियों को योग के साथ-साथ वैकल्पिक चिकित्सा का अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह पद्धति सीखने में सरल है और इसमें अधिक खर्च भी नहीं होता, जिससे इसे कहीं भी आसानी से अपनाया जा सकता है।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से डॉ० अपिर्त जोशी, योग प्रशिक्षक श्री राजेंद्र नौटियाल सहित शोधार्थी एवं अनेक छात्र-छात्राएं उपस्

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