जम्मू-हिमाचल-उत्तराखंड समेत 7 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और पहाड़ दरकने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तराखंड के धारचूला में भारी बारिश के बाद चीन सीमा से जोड़ने वाले तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर ऐलागाड़ और कुलागाड़ के पास पहाड़ी दरक गई। इसकी वजह से दारमा, चौदास और व्यास तीनों घाटियों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
जम्मू संभाग में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश और भूस्खलन ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।मौसम विभाग ने पंजाब, राजस्थान, यूपी समेत सात राज्यों में 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में अगले सात दिनों तक भारी बारिश जारी रहने के आसार है।जम्मू संभाग में बाढ़, भूस्खलन एवं बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अब सोमवार को जम्मू आएंगे। वह सुबह 10:45 बजे से प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाकों कटड़ा, रियासी, रामबन, कठुआ, चिशोती का हवाई निरीक्षण करेंगे। देहरादून में आज भी बादल छाए हुए हैं सुबह से कई बार रम रिमझिम बारिश हो चुकी है।

उत्तराखंड में मौसम विभाग ने आज देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली बागेश्वर जिले में अत्यधिक बारिश होने की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट और अन्य जिलों के लिए भारी बारिश के मद्देनजर येलो अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड के धारचूला में तवाघाट-लिपुलेख के साथ सोबला सड़क पहाड़ी दरकने के कारण बंद हो गई है। लगातार मलबा और बोल्डर गिरने से आवाजाही ठप बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर में मौसम विभाग ने अब 2 सितंबर तक भारी बारिश के साथ भूस्खलन होने का भी खतरा जताया है। इसका सबसे ज्यादा असर जम्मू संभावग पर रहेगा। ऑरेंज अलर्ट का असर कश्मीर संभाग में नहीं होगा। रामबन और रियासी में पुराने भूस्खलन क्षेत्र फिर सक्रिय हो गए हैं। सैकड़ों साल पुराने इन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा से हालात बिगड़ रहे हैं। खासकर, नाशरी टनल से लेकर पंथ्याल तक का 20-30 किलोमीटर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील हो गया है। जम्मू स्थित पश्चिमी हिमालय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक और रामबन में भूस्खलन पर लंबे समय तक कार्य कर चुके रियाज मीर के अनुसार, एनएच-44 पर विकास संबंधी गतिविधियां, जैसे सड़क बनाने के लिए चट्टानों का काटा जाना, इस इलाके से एमबीटी (मेन बाउंड्री थ्रस्ट) का गुजरना, जलवायु में बदलाव और रामबन की मुरी चट्टान संरचना, ये सब मिलकर रामबन को भूस्खलन के लिए बेहद संवेदनशील बनाते हैं। चट्टानों को काटे जाने से ढलान अस्थिर हो जाती है।
मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। ऐसे में अत्यधिक वर्षा मलबे को अपने साथ बहा ले जाती है।पंजाब के बाढ़ प्रभावित जिलों में बीएसएफ जवान दिन-रात विशेष अभियान चलाकर लोगों को बचाने में जुटे हैं। बीएसएफ ने शनिवार को हेलिकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्रों में राशन के हजारों पैकेट गिराए गए।


