उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में संस्कृत सप्ताह का भव्य एवं दिव्य शुभारंभ

देववाणी के जयघोष से गूंजा विश्वविद्यालय परिसर
बहादराबाद /हरिद्वार/ (बी बी चंदेला ) l देवभूमि की ज्ञान-नगरी हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह समारोह का आज वैदिक मंगलाचरण, स्वस्तिवाचन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ अत्यंत भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित इस ज्ञान-यज्ञ में वेद मंत्रों की दिव्य ध्वनि से संपूर्ण वातावरण संस्कृतमय हो गया।
समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री गौरव शास्त्री ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं, अपितु यह भारतवर्ष की आत्मा, संस्कृति की प्राण-धारा और विश्व-कल्याण की उद्घोषक है। उन्होंने कहा –
_‘अमृतं संस्कृतं मित्र, सरसं सरलं वचः’_
संस्कृत वह अमृततुल्य सरस वाणी है जो संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखती है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु युवाओं को संकल्पबद्ध होकर आगे आना होगा। संस्कृत को व्यवहार की भाषा बनाना ही सच्ची राष्ट्र-सेवा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय देववाणी के प्रचार-प्रसार के लिए अहर्निश कृतसंकल्पित है। उन्होंने कहा कि श्रावण पूर्णिमा से ऋषि पर्व तक मनाया जाने वाला यह संस्कृत सप्ताह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्म-गौरव के जागरण का पर्व है। इसका मूल उद्देश्य युवा पीढ़ी के हृदय में अपनी जड़ों तथा अपनी संस्कृति के प्रति स्वाभिमान और अनुराग उत्पन्न करना है। कुलपति ने सप्ताहभर चलने वाले कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए छात्रों के लिए इसे अत्यंत उपयोगी बताया। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में वैदिक घोष के साथ भव्य संस्कृत शोभायात्रा निकाली गई।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार ने सभी अतिथि महानुभावों का शब्द-सुमनों से स्वागत किया। उन्होंने सप्ताह भर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत संस्कृत निबंध प्रतियोगिता, शुद्ध श्लोकोच्चारण, शास्त्रार्थ एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता, काव्य-पाठ, आशु-भाषण, संस्कृत संभाषण कार्यशाला तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं आचार्यों ने छात्र-छात्राओं को जीवन में नित्य संस्कृत संभाषण करने तथा संस्कृत को अपने आचार-व्यवहार में आत्मसात करने का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर प्रो. मोहन चन्द्र बलोदी ,प्रो दिनेश चमोला,प्रो लक्ष्मी नारायण जोशी सहित विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं संयोजन मुख्य संयोजक प्रो. दामोदर परगाईं ने किया।




