गैरसैण सत्र: महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व महंगाई पर हंगामेदार रहेगा विसभा सत्र

इसके अलावा 450 सवालों से सत्तापक्ष को कटघरे में खड़ा करेगा विपक्ष
– बहुमत के आधार पर अनुपूरक बजट व विधेयक पारित कराने में सत्तापक्ष को नहीं होगी मुश्किल
देहरादून/गैरसैण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में मंगलवार 27 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा विधानसभा का शीतकालीन सत्र के बेहद हंगामेदार होने की आशंका है। पर्वतीय क्षेत्र में कड़ाके की ठंड के बीच सदन के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर सियासी पारा चरम पर है। एक तरफ धामी सरकार सदन में करीब ₹7,000 करोड़ का अनुपूरक बजट और कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरने के लिए तैयारी में हैं।

सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है और लगभग 1500 जवानों को तैनात किया गया है। सत्र की अवधि से लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था तक, विपक्ष के पास सरकार पर हमला करने के लिए कई मुद्दे हैं।
सरकार ने यह सत्र 27 और 28 अक्टूबर (सिर्फ दो दिन) के लिए रखा है। कांग्रेस और बसपा (BSP) का आरोप है कि सरकार जनता के जरूरी मुद्दों पर व्यापक चर्चा से भाग रही है और इस सत्र को महज एक औपचारिक औपचारिकता बना दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्र गैरसैंण में हो रहा है, लेकिन इसकी रूपरेखा तय करने वाली कार्यमंत्रणा समिति (BAC) की बैठक देहरादून में आयोजित की गई। कांग्रेस ने इसे गैरसैंण का अपमान बताते हुए इस बैठक का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया।
उत्तराखंड क्रांति दल और स्थानीय आंदोलनकारी गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी और अलग जिला घोषित करने की मांग को लेकर ‘गर्जना रैली’ निकाल रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार पहाड़ों के विकास को लेकर गंभीर नहीं है।
महिलाओं की सुरक्षा और लंबे समय से चले आ रहे अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर राज्य आंदोलनकारी और विपक्षी दल सदन के बाहर बड़े प्रदर्शन की तैयारी में हैं।
पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल व नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित कांग्रेस नेताओं ने कैबिनेट मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, राज्य में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को सदन के पटल पर उठाने का फैसला किया है। इस बार विपक्षी दलों और संगठनों ने सरकार को दोतरफा चुनौती देने की रणनीति बनाई है।
विधायकों ने इस सत्र के लिए 430 से अधिक सवाल लगाए हैं। हालांकि पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दिए जाने के कारण प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन दूसरे दिन विपक्ष इन सवालों के जरिए सरकार से हर विभाग का हिसाब मांगेगा।
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल और प्रदेश प्रधान संगठन ने 27 अक्टूबर को विधानसभा घेराव का एलान किया है। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच धामी सरकार ने भी तथ्यों और आंकड़ों के साथ पलटवार करने की रणनीति बनाई है। सरकार चालू वित्तीय वर्ष की अपनी प्राथमिकताओं और विकास कार्यों को गति देने के लिए सदन में ₹7,000 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश कर उसे पारित करवाएगी।
इस सत्र के दौरान लगभग 8 महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन के पटल पर मंजूरी के लिए रखा जाना तय हुआ है। भाजपा का कहना है कि सत्र की अवधि विधायी कामकाज (बिजनेस) की उपलब्धता के आधार पर तय की जाती है और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए हंगामा कर रहा है। गैरसैंण का यह दो दिवसीय सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन भौगोलिक पहचान (पहाड़ बनाम मैदान), सत्र के नियमों और राज्य के बुनियादी मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली सियासी तकरार इस कड़ाके की ठंड में भी सदन के माहौल को पूरी तरह गर्म रखेगी।



