उत्तराखण्ड

देहरादून जिला पंचायत की ई-निविदा विवादों में, स्थानीय व्यापारियों ने मंत्री कौशिक को सौंपा ज्ञापन

स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप

देहरादून। जिला पंचायत द्वारा 13.04.2026 को जारी ई-निविदा पर स्थानीय विज्ञापन व्यवसायियों ने भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। व्यवसायियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंचायती राज मंत्री श्री मदन कौशिक को ज्ञापन सौंपकर निविदा को निरस्त करने की मांग की।

व्यवसायियों का कहना है कि विभाग “एक देश, एक विधान” की बात तो करता है, लेकिन निविदा की शर्तें केवल बाहरी बड़ी कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई हैं।

स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप
विज्ञापन व्यवसायियों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि जिला पंचायत ने जानबूझकर ‘विज्ञापन शुल्क वसूली’ और ‘यूनीपोल किराया’ जैसे दो अलग-अलग कार्यों को एक ही निविदा में जोड़ दिया है। इस कारण ‘हैसियत प्रमाण पत्र’ (Solvency) की राशि बढ़कर 50 लाख रुपये हो गई है, जिसे पूरा करना स्थानीय छोटे व्यापारियों के बस से बाहर है।

मुख्य आपत्तियां 
तानाशाही कार्यप्रणाली: स्थानीय व्यापारियों द्वारा लिखित में दर्ज कराई गई दर्जनों आपत्तियों पर विभाग ने अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है।

अनुभव की विसंगति

निविदा में उत्तराखंड के बजाय अन्य राज्यों के अनुभव पर अंक दिए जा रहे हैं, जो स्थानीय निवासियों के स्वरोजगार पर सीधा प्रहार है।
संवाद का अभाव: इतनी महत्वपूर्ण निविदा होने के बावजूद विभाग ने प्री-बिड मीटिंग (Pre-Bid Meeting) आयोजित नहीं की, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

न्यायालय की शरण में भी मामला
उल्लेखनीय है कि इस मामले में कुछ स्थानीय एजेंसियों (जैसे ओंकार एडवरटाइजिंग) ने उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। व्यवसायियों का डर है कि यदि यह ठेका किसी बड़ी बाहरी फर्म को मिलता है, तो वह स्थानीय छोटे विज्ञापनदाताओं का उत्पीड़न करेगी और उनसे मनमाना शुल्क वसूलेगी।

मंत्री का आश्वासन

पंचायती राज मंत्री श्री मदन कौशिक ने व्यवसायियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया है। व्यापारियों ने स्पष्ट मांग की है कि इस निविदा को तत्काल निरस्त किया जाए और दोनों कार्यों के लिए अलग-अलग निविदाएं आमंत्रित की जाएं ताकि ‘लोकल फॉर वोकल’ का संकल्प धरातल पर दिख सके।

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