उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री धामी के विकास मॉडल की गूंज, एमओयू से लेकर मैदान तक उतर रहे उद्योग

देहरादून। निवेश और उद्योग के क्षेत्र में सरकार का कहना है कि जो कभी केवल घोषणाएं ही मानी जा रही थीं, वे अब जमीन पर आकार लेने लगी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालने के बाद उत्तराखंड को सिर्फ पर्यटन राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, आईटी, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स के नए केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा। इसी सोच के तहत आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लगभग ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव (एमओयू) हुए।

सरकार का दावा है कि इनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं की ग्राउंडिंग हो चुकी है और अनेक परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देने लगी हैं। इसका असर सबसे पहले औद्योगिक क्षेत्रों में दिखाई देता है। ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में नेस्ले इंडिया ने अपनी फूड प्रोसेसिंग इकाई का विस्तार किया।

हरिद्वार में पतंजलि समूह ने एफएमसीजी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई उत्पादन क्षमता विकसित की। आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर ने भी अपने प्लांटों का विस्तार कर उत्पादन बढ़ाया. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई।

ऑटोमोबाइल सेक्टर भी पीछे नहीं रहा। हरिद्वार में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई, जबकि पंतनगर में अशोक लीलैंड ने अपने संयंत्र का विस्तार किया। टीवीएस सप्लाई चेन ने भी लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए। सरकार का दावा है कि इन विस्तार परियोजनाओं से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की राह खुली है। दून को आईटी हब बनाने की दिशा में भी कदम बढ़े हैं। नगारो और टू दी न्यू जैसी कंपनियों ने यहां अपने कार्यालय शुरू किए हैं। लंबे समय से राज्य के युवा आईटी क्षेत्र में नौकरी के लिए बेंगलुरु, पुणे और गुरुग्राम का रुख करते थे, लेकिन अब उत्तराखंड में भी अवसर बढ़ने की उम्मीद जगी है।

ऊर्जा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में जेएसडब्ल्यू समूह की परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं, जबकि अडानी समूह ने भी लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की प्रक्रिया शुरू की है. ड्रोन, मेडिकल डिवाइस, एयरोस्पेस, फूड प्रोसेसिंग, सेमीकंडक्टर, एग्रीटेक और हेल्थकेयर से जुड़ी कई परियोजनाओं पर भी काम जारी है।

रानीपोखरी में प्रस्तावित आईटी टावर और डोईवाला की एयरोसिटी को भी सरकार भविष्य के बड़े विकास केंद्र के रूप में देख रही है. सरकार का तर्क है कि निवेश केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके साथ सड़क, बिजली, पानी, परिवहन, होटल, वेयरहाउसिंग और स्थानीय कारोबार भी बढ़ता है. यही कारण है कि निवेश को राज्य की अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में पेश किया जा रहा है।

बेशक विपक्ष यह सवाल उठाता है कि हर एमओयू उद्योग में नहीं बदलता और कई परियोजनाएं अभी प्रक्रिया में हैं लेकिन सरकार का कहना है कि पहली बार निवेश प्रस्तावों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और बड़ी संख्या में परियोजनाएं या तो निर्माणाधीन हैं या उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहेंगे, लेकिन यदि इन निवेशों से रोजगार, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलती है, तो इसका लाभ सीधे उत्तराखंड के युवाओं और आम जनता को मिलेगा। शायद इसी वजह से धामी सरकार बार-बार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विकास का मूल्यांकन नारों से नहीं, बल्कि धरातल पर खड़े उद्योगों और मिलने वाले रोजगार से होना चाहिए।

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