उत्तराखण्ड

चमोली में तेज रफ्तार कार ने 7 वर्षीय बच्चे को मारी टक्कर, अस्पताल ले जाते हुए मौत

बिना किसी डॉक्टर या फार्मासिस्ट के, सिर्फ चालक के भरोसे भेजा 50 किमी दूर, बच्चे ने रास्ते में तोड़ा दम

108 भी नहीं मिली मौके पर 

चमोली।  जिले के विकासखंड गैरसैण के फरसों गांव के पास शिवरात्रि के दिन मंदिर से दर्शन कर लौट रहे एक 7 वर्षीय बच्चे को तेज रफ्तार कार ने न सिर्फ टक्कर मारी, बल्कि उसे दूर तक घसीटती ले गई। इस हादसे के बाद बच्चे को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई।

घटना रविवार को फरसों गांव के पास हुई। बच्चा अपनी मां और छोटी बहन के साथ धुनारघाट शिवालय से लौट रहा था। घर के ठीक सामने सड़क पार करते समय एक वैगनआर कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बच्चा टायर के साथ घसीटता चला गया, जिससे उसके सिर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया।

108 एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाने में करीब एक घंटे की देरी हो गई। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गैरसैंण ने बच्चे की नाजुक स्थिति को जानते हुए भी उसे बिना किसी डॉक्टर या फार्मासिस्ट के, सिर्फ चालक के भरोसे 50 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग रेफर कर दिया। 50 किमी लंबे इस सफर में बच्चे ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि गैरसैंण का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र “अस्पताल कम, रेफर सेंटर ज्यादा” बनकर रह गया है। उनका आरोप है कि यदि समय पर समुचित इलाज मिलता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

रास्ते में पड़ने वाले मालसी स्वास्थ्य केंद्र पर भी उसे कोई प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका। चमोली के सीएमओ अभिषेक गुप्ता ने स्वीकार किया कि गंभीर मामलों में स्टाफ का साथ जाना अनिवार्य है, लेकिन उस दिन स्टाफ की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया गया।

इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने गैरसैंण कोतवाली का घेराव कर भारी हंगामा किया। पुलिस ने शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिससे लोग और भड़क गए। अब भारी दबाव के बाद महिला कार चालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 106 और 125 के तहत नामजद रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासूम की असमय मौत से गांव में मातम पसरा है और हर कोई यही पूछ रहा है, क्या इस त्रासदी के बाद व्यवस्था जागेगी?

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