सत्ता परिवर्तन का रास्ता अराजकता नहीं, जनमत है: महेंद्र भट्ट

कांग्रेस गलतफहमी छोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करे: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने और राजनीतिक परिस्थितियों का यथार्थ स्वीकार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्ता के द्वार अराजकता से नहीं, बल्कि जनता के जनादेश से खुलते हैं। देश और उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल मतदाताओं के पास है।
भट्ट ने कांग्रेस और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे चुनावी असफलताओं से हताश होकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाए, फिर संवैधानिक जांच एजेंसियों की छवि धूमिल करने के प्रयास किए और संसद की कार्यवाही बाधित की। अब चुनावी संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन को भी अनुचित बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिश लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की ओर से सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए जा रहे बयानों से उनकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता का समर्थन हासिल करने के बजाय नकारात्मक राजनीति, भ्रम और अफवाहों का सहारा ले रही है। भट्ट के अनुसार, वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ समर्थक ऐसे विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो देश की एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में इस तरह की अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन की किसी भी कोशिश को जनता स्वीकार नहीं करेगी।
भट्ट ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सरकारों का गठन संविधान तथा चुनावी प्रक्रिया के तहत होता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के बीच जाकर जनसमर्थन हासिल करना चाहिए, न कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर माहौल खराब करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में भी सरकार का भविष्य प्रदेश के मतदाता ही तय करेंगे। किसी भी राजनीतिक दल को जनता के जनादेश के अलावा किसी अन्य तरीके से सत्ता हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।


