उत्तराखण्डराजनीति

पीए पर ईडी छापे के बाद पूर्व सीएम रावत का बयान: ‘कांग्रेस की सदस्यता मेरे खून में, पार्टी पर असर पड़ा तो छोड़ दूंगा पद’

देहरादून l वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में है। हरीश रावत जो कुछ भी है, उस सबका निर्माण करती है। वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जाएगी। सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में उन्होंन कहा कि यदि कल-परसों देहरादून में ईडी का जो पाखंडपूर्ण चकल्लस हुई है और मैंने यह कहा है कि यदि उससे कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है, तो पार्टी के जो पद मेरे पास हैं, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और एआईसीसी की वर्किंग कमेटी के सदस्य मैं उन पदों से त्यागपत्र देना चाहूंगा।

पूर्व सीएम रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कार्य से पार्टी का संघर्ष कमजोर हो। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ओएसडी के परिसरों पर छापा मारा था। यह छापा 2016 की उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धन शोधन जांच के संबंध में था। रावत ने अपने सहयोगी द्वारा किसी भी गलत काम के आरोपों से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि टेलीविजन पर उनके निजी सहायक से नकदी और आभूषण जब्त होने की खबरें थीं।

रावत ने स्वीकार किया कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं। उन्होंने पार्टी और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने जीना को एक विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया। रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ हुई है, तो उन्हें शर्म आएगी। हालांकि, उन्हें इस आरोप पर विश्वास नहीं है।

उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में “बड़ा दांव” लगने की बात कही। कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहे हैं। राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

रावत ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चुनाव तब होते हैं जब सीबीआई उनके दरवाजे पर आती है। इस बार उनके सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक कहानी गढ़ने का प्रयास किया गया है। रावत ने कहा कि ऐसे समय में यदि उनके किसी कार्य से पार्टी का संघर्ष कमजोर होता है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। इसलिए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया है।

कांग्रेस पदों से त्यागपत्र
रावत ने बताया कि वह कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं, इसलिए वहां से त्यागपत्र देने का सवाल ही नहीं है। हालांकि, वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी सदस्य हैं। साथ ही, वह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य भी हैं। उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ इन दोनों पदों से हटने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी का संघर्ष किसी भी तरह से कमजोर हो।

यूकेएसएसएससी और भर्ती प्रक्रिया पर विचार
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के संबंध में, हरीश रावत ने कहा कि इसे राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया था। उन्होंने लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षा आयोजित करने के लिए मजबूर किया। उनके छोटे कार्यकाल के दौरान, शीर्ष पदों के लिए दो बार भर्तियां हुईं।

उन्होंने भर्ती बोर्ड, एक चिकित्सा भर्ती बोर्ड और एक शिक्षा भर्ती बोर्ड का गठन किया। उन्होंने कहा कि यदि उस प्रक्रिया में नियुक्तियों में उनकी ओर से कोई गलती हुई है, तो वह उत्तराखंड के लोगों से माफी मांगेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी के तीन साल के कार्यकाल में 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां की गईं।

आरोपों का खंडन और न्याय की अपील
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यूकेएसएसएससी अध्यक्ष की नियुक्ति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। वह समाज के एक ऐसे वर्ग से थे जिसका प्रतिनिधित्व वह सुनिश्चित करना चाहते थे। रावत ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) ने उन्हें इस नियुक्ति के संबंध में सलाह दी थी।

उन्होंने कहा कि खंडूरी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करते थे। रावत ने कहा कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि नियुक्त व्यक्ति गलत काम करेगा या नहीं। उन्होंने आरएसएस का उदाहरण देते हुए कहा कि क्या वे जानते थे कि उनके पर्यावरण मंच के प्रमुख भ्रष्ट कार्य करेंगे। रावत ने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में अनियमितताएं आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से छेड़छाड़ से कम नहीं हैं।

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