केन्द्र पोषित योजना बदलेगी जिला अस्पतालों की सूरत: डॉ. धन सिंह ~

केन्द्र पोषित योजना बदलेगी जिला अस्पतालों की सूरत: डॉ. धन सिंह

केन्द्र पोषित योजना बदलेगी जिला अस्पतालों की सूरत: डॉ. धन सिंह

देहरादून। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत लगातार चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं । प्रदेश  में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ और
अवस्थापना सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में कैसे और सुधार हो सकता है , इसके लिए बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री ने कर्नाटक और केरल का भी दौरा किया था।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि
केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना (यूएचएसडीपी ) के जरिये सूबे के जिला अस्पतालों की सूरत बदली जायेगी। परियोजना के प्रथम चरण में सूबे के पांच जिला चिकित्सालयों का चयन कर सुधारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके तहत अस्पतालों की गुणवत्ता संवर्द्धन के लिये एनएबीएच स्तरीय मानकों के अनुरूप संसाधन जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। ताकि आने वाले समय में जिला अस्पतालों को आसानी से एनएबीएच मान्यता मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ.  रावत ने बुधवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में एनएचएम के अंतर्गत केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के अंतर्गत चयनित पांच जिला चिकित्सालयों अल्मोड़ा, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, चमोली तथा जिला महिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़करण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत चयनित चिकित्सालयों में एनएबीएच स्तरीय मानक पूर्ण करने के लिये गैप एसेसमेंट के आधार पर शासन  से  पूर्व में ही डीपीआर अनुमोदित कर लगभग रूपये 74 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। जिसके तहत चयनित जिला चिकित्सालयों में 10 विशेषज्ञ चिकित्सक, 10 स्टाफ नर्स, 2 लैब टेक्निशियन, एक एक्स-रे टेक्नीशियन तथा एक मैट्रन तैनात किये जाने का प्रावधान है।

इसके अलावा परियोजना के अंतर्गत अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस कार्य के लिए रूपये 20 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है, जबकि शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान आईआईएचएमआर जयपुर एवं एएससीआई हैदराबाद के माध्यम से सीएमओ, सीएमएस व एसीएमओ को कौशल संबर्द्धन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी प्रकार चयनित चिकित्सालयों में लोक निजी सहभागिता के अंतर्गत कम्युनिकेशन कार्य योजना एवं डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान भी अपडेट किया जा रहा है। विभागीय मंत्री ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2023 तक परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर चयनित जिला चिकित्सालयों में अमूलचूल परिर्वतन देखने को मिलेगा, जिससे चिकित्सालयों को एनएबीएच एक्रिडिएशन कराने में खासी मदद मिलेगी।

समीक्षा बैठक में प्रभारी अधिकारी डॉ. अमित शुक्ला ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 28 पदों पर तैनाती दे दी गई है। इसी प्रकार स्टॉफ नर्स के स्वीकृत 50 पदों, एक्स-रे टेक्नीशियन तथा मैट्रन के 05 पदों एवं लैब टेक्नीशियन के 10 पदों के सापेक्ष पूर्ण तैनाती कर दी गई है। जबकि अधिकारियों के प्रशिक्षण का कार्य गतिमान है।
बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार,  निदेशक एनएचएम डॉ. सरोज नैथानी, एपीडी यूएचएसडीपी डॉ. प्रेम लाल, संयुक्त निदेशक पीपीपी डॉ. अमित शुक्ला, वित्त नियंत्रक बिरेन्द्र कुमार, डॉ. विपुल विश्वास, डॉ. राजन अरोड़ा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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