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आजादी के आंदोलन में वन्देमातरम् की भूमिका महत्त्वपूर्ण: कुलपति

बी बी चंदेला

हरिद्वार। साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा आयोजित वरिष्ठ साहित्यकारों के व्याख्यानमाला के अंतर्गत उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पांडेय का व्याख्यान सम्पन्न हुआ।
साहित्य अकादमी के द्वारा 30 मार्च से 4 अप्रैल तक नई दिल्ली में “साहित्योत्सव” कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित की गई। राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कुलपति ने कहा कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में “वन्दे मातरम्” गीत की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही ,जिस गीत को गाकर आज़ादी के वीर शहीद फाँसी के फंदे पर झूल गए,उस कालखण्ड में भारत के युवकों में वन्देमातरम् गीत ने ही देशभक्ति का जज्बा पैदा किया था। उन्होंने कहा की वन्दे मातरम् वह अमरगीत है जो आजादी के दीवानों का महामन्त्र था, राष्ट्र की एकता और अखंडता में इस गीत का महान् योगदान है।
कुलपति ने कहा कि संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई धार दी, संस्कृत के छात्र रहे अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद के योगदान को भला कौन नहीं जानता। आजादी के आंदोलन को संस्कृत भाषा व विद्वानों से जोड़ते हुए उन्होंने अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि संस्कृत और वेदों के विद्वान गुरुकुल काँगड़ी के संस्थापक अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द जी आजादी के आंदोलन को मजबूत करने के लिए छात्रों को तैयार कर स्वयं भी स्वतन्त्रता आंदोलन में प्राण प्रण से जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अनेक विद्वानों ने आजादी के आंदोलन में सर्वस्व न्यौछावर कर दिया,कुमाऊँ के चम्पावत ,अल्मोड़ा के सल्ट, सालम पट्टी , चम्पावत,कोटद्वार जैसी जगहों से भी भारी संख्या में लोग इस संग्राम में कूद पड़े थे। उन्होंने उत्तराखण्ड के अनेक देशभक्तों, संस्कृत साहित्यकारों की सप्रमाण चर्चा की।
इस अवसर पर साहित्य अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कुलपति प्रोफेसर पांडेय का स्वागत अभिनन्दन कर सम्मानित किया।

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