काली फीती बांधकर कर्मचारियों ने जताया विरोध

बोले- मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा उग्र
हरिद्वार (चंद्रशेखर जोशी)। पदोन्नति समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर के आयुर्वेदिक कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने काली फीती बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से संज्ञान नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
कर्मचारियों का कहना है कि करीब दस वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है। कनिष्ठ सहायक, डार्क रूम सहायक, ओटी सहायक और लैब सहायक जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति लंबित है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पदोन्नति प्रक्रिया में बार-बार अड़चनें डाली जा रही हैं, जो न्यायोचित नहीं है। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को भी भेजी गई है।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा और महामंत्री सुनील अधिकारी ने कहा कि यदि जल्द पदोन्नति समेत अन्य मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से सबसे छोटे संवर्ग के कर्मचारियों की समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान करने की मांग की।
कर्मचारियों ने पौष्टिक आहार भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ता बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि कर्मचारियों का धुलाई भत्ता बढ़ाकर 500 रुपये किया जाना चाहिए। साथ ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट से कम शैक्षिक योग्यता वाले कर्मचारियों को पौष्टिक आहार भत्ता दिए जाने की मांग की गई।
प्रदेश संगठन सचिव छत्रपाल सिंह, प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, जिला मंत्री राकेश भंवर, ऋषिकुल उप शाखा मंत्री अजय कुमार और गुरुकुल उप शाखा अध्यक्ष ताजबर सिंह ने कहा कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को कई वर्षों से पदोन्नति नहीं मिली है। उन्होंने ऋषिकुल-गुरुकुल राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज चिकित्सालय, हरिद्वार को विश्वविद्यालय हर्रावाला से अलग कर पूर्व की भांति राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के रूप में संचालित करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि इससे अस्पताल में वेतन, पेंशन और दवाओं आदि की व्यवस्था राज्य स्तर से पूर्व की तरह हो सकेगी और कर्मचारी मरीजों की सेवा बेहतर ढंग से कर सकेंगे।
काली फीती बांधकर विरोध जताने वालों में दिनेश लखेड़ा, छत्रपाल सिंह, राजेंद्र तेश्वर, राकेश भंवर, मूलचंद चौधरी, अजय कुमार, नितिन कुमार, सुरेंद्र सिंह, ललित शाह, महेंद्र पड़ियार, भोपाल शाह, नवीन नवानी, जीवन सिंह, सुमंत पाल, प्रबल सिंह, ज्योति नेगी, अमित कुमार, सतीश, कमल, प्रवीण पुरोहित, उदयभान विनोद, राकेश कुमार, बृजेश डोली, केलाशो, त्रिलोक सिंह समेत प्रदेशभर के कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन कभी भी उग्र रूप ले सकता है।



