उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

बीकेटीसी में ग्रेड पे के अनुसार दिया जा रहा है वेतन: हेमंत द्विवेदी

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से संबद्ध पुजारियों और कर्मचारियों को राजकीय कर्मियों की तर्ज पर वेतनमान

सरकार के नियंत्रण में मंदिरों के प्रबंधन को रास्ता दिखा रही बीकेटीसी

देहरादून। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के पुजारियों और कर्मचारियों को ग्रेड पे के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। कुछ वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए शासन स्तर पर पहल की जा रही है।

दरअसल, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से संबद्ध पुजारियों और कर्मचारियों को राजकीय कर्मियों की तर्ज पर वेतनमान सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों व कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों का मुद्दा उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया है। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में कहा गया है कि जब सरकारें मंदिरों का प्रशासन और आय नियंत्रित करती हैं, तो वहां सेवा देने वाले पुजारियों को सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं।

इस बारे में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि पूजा संवर्ग से जुड़े कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए शासन स्तर पर गंभीरता से पहल की गई है। बीकेटीसी के अंतर्गत विभिन्न श्रेणी के पुजारी नियमित सेवा ढांचे में कार्यरत हैं और उन्हें ग्रेड पे आधारित वेतन दिया जा रहा है।

समिति के अनुसार पुजारी वर्ग 2000 और 2400 ग्रेड पे श्रेणी में कार्य कर रहा है, जबकि रावल और नायब रावल लिए 2800 ग्रेड पे निर्धारित है। कुछ श्रेणियों में यह व्यवस्था 4200 ग्रेड पे तक पहुंचती है। मंदिरों के पुजारियों को केवल दक्षिणा पर निर्भर नहीं छोड़ा गया, उन्हें राजकीय कर्मचारियों की तरह नियमित वेतन व आय में हिस्सेदारी भी प्रदान की जाती है।

पूजा परंपराओं व सुविधाओं का प्रबंधन करती है समिति : श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति की स्थापना 1939 के श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम के तहत की गई थी। समिति का प्राथमिक उद्देश्य बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की पूजा परंपराओं, उनकी विशाल संपत्तियों और लाखों तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को व्यवस्थित संचालन करना था। प्रशासनिक रूप से, इसमें राज्य सरकार की ओर से मनोनीत 17 सदस्य होते हैं। .बीकेटीसी लगभग 47 संबद्ध मंदिरों व 20 धर्मशालाओं की देखरेख करती है। यह संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सात विद्यालय चलाती है और गुप्तकाशी में एक आयुर्वेदिक फार्मेसी का संचालन भी करती है। आदि गुरु शंकराचार्य और पौराणिक ग्रंथों की विरासत को सहेजने का काम संस्था कर रही है।

उन्होंने कहा कि बीकेटीसी से संबद्ध पुजारियों की भूमिका केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना व्यवस्था कराने और धामों की परंपराओं के संरक्षण में भी उनकी भूमिका अहम है।

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