उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

भील समाज ने युद्ध में दिया था महाराणा को समर्थनः भैय्या जी जोशी

रुड़की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में बृहस्पतिवार को आईआईटी रुड़की में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सर कार्यवाह एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैय्या जी जोशी ने कहा कि विश्व ने भारत को जिम्मेदारी दी है कि वह विश्व का शुद्धिकरण करें। भारत का सदा से विश्व को श्रेष्ठ देने का मन रहा है और इसेे भारत सदेव देता रहेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी विचार को लेकर आगे बढ़ रहा है।
100 साल की राष्ट्रीय सामाजिक यात्रा में संघ ने विश्व को भारत के इस रूप का बोध कराया है, जिसका जिक्र स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंदो ने किया था। हजारों साल की जीवन यात्रा से भारत के जीवन मूल्य तय हुए जो सामान्य लोगों के जीवन से आए। भैया जी जोशी ने हिंसाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार और मिथ्याचार को सबसे बड़ी समस्या बताया। युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि भारत को जानो, भारत को मानो और भारत को बनाओ। भारत को बनाने में सभी ने भूमिका निभाई। मुगलो के साथ युद्ध में महाराणा प्रताप को भील समाज ने समर्थन दिया। भैया जी जोशी ने कहा कि शौर्य का मतलब दुर्लभ की रक्षा करना है यही भारत की दृष्टि है। हमें नई पीढ़ी को तर्क के आधार पर अपनी चिंतन और संस्कृति की विशेषताएं बतानी है। भैया जी जोशी ने कहा कि केवल राजा के आधार पर समाज नहीं चलता है। समाज संचालन के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण है, जो मनुष्य को मानव बनाये मशीन नहीं। देश का औद्योगिकरण हो, कलाकारों के द्वारा सकारात्मक संदेश समाज में दिए जाएं, धार्मिकता से भी सकारात्मक का ज्ञान समाज को दिया जाए और देश शौर्य शाली बने। अर्थात दूसरों की रक्षा करने वाला बने और राजनीति भी राष्ट्र के आधार पर होनी चाहिए। भैया जी जोशी ने कहा कि 100 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा है और भविष्य में भी समाज का सहयोग संघ को सदैव मिलता रहेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रवीण एरन ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख जगदीश, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र, सह प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर, राकेश, अनुज, ललित शंकर, मनोज, प्रवीण, जल सिंह, त्रिभुवन, जितेंद्र, रमेश, सतीश, विवेक, बंशीधर, राहुल, नवीन आदि उपस्थित रहे।

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