उत्तराखण्ड

आरक्षण में वर्गीकरण करके दलित समाज को बांट रही भाजपाः जायसवाल

देहरादून। राष्ट्रीय अनुसूचित जाती जनजाति विकास परिषद की एक बैठक संगठन के महासचिव जेपी सिंह के निवास स्थान पर हुई जिसमें मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद भारत के राष्ट्रीय सचिव गीता राम जायसवाल रहे। जयसवाल ने कहा कि उत्तराखंड में संगठन को मजबूत किया जाए और जगह-जगह जाकर संगठन की मीटिंग बुलाई जाए।
जयसवाल ने उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रेम सिंह से कहा कि आप प्रदेश के हर जिले में जाकर बैठक आयोजित करें और अनुसूचित जाति समाज की समस्या सुने और उनका समाधान करें। कार्यकारिणी में कोई पदाधिकारी जिम्मेदारी से भागता है तो उसको तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रेम सिंह ने कहा कि आगे से ऐसा ही होगा जो पदाधिकारी सक्रिय नहीं होगा और संगठन को समय नहीं देगा तो उसको हटाकर उसकी जगह दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप जाएगी।
डॉ प्रेम सिंह ने कहा कि भाजपा शासन काल में आरक्षण में वर्गीकरण करके दलित समाज को बांटने का काम किया है। यह दलित समाज व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद बर्दाश्त नहीं करेगा। महासचिव जयपाल सिंह एडवोकेट ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में सबसे ज्यादा दलित समाज की महिलाओं के साथ छेड़खानी के मामले सामने आ रहे हैं। बलात्कार की घटना भी हो रही है। भाजपा के शासनकाल में महिला सुरक्षित नहीं है। प्रदेश सचिव राकेश बर्मन ने कहा कि प्रदेश के अंदर सड़के टूटी हुई है सड़कों का बुरा हाल है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल धीमान ने कहा कि देहरादून शहर में कई बस्तियों को उजाडा़ गया है उनके घर तोड़ दिए गए हैं जहां भी घर टूटे हैं वह सभी बस्तियां दलित समाज के लोगों की है। देहरादून में कई बस्तियों में  बुलडोजर चलाया, सभी मकान दलितों के टूटे हैं। मीडिया प्रभारी सोनू सहगल का कहना है कि दलितों के साथ में अन्याय किया जा रहा है जो कि गलत है। भाजपा के सरकार में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं बहुत ज्यादा सुनने को आ रही है अभी कुछ दिन पहले अयोध्या में बने राम मंदिर के अंदर एक काम करने वाली लड़की के साथ में गैंग रेप की घटना सामने आई थी। गैंगरेप करने वाले हिंदू युवा थे लेकिन भाजपा शासन काल में  बलात्कारियों को पनहा दी जाती है। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष करण कनौजिया, उपाध्यक्ष अनिल धीमान, प्रदेश महासचिव जयपाल सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

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