मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं, वन संरक्षक उत्तरी वृत्त व डीएफओ सिविल सोयम निलंबित

धीरज पांडे को बनाया मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं,
अब इन्हे दी गई नई जिम्मेदारी, हेमचंद गहतोड़ी बने डीएफओ अल्मोड़ा
देहरादून। विगत दिवस बिन्सर वन्यजीव विहार में वन कर्मियों की बोलेरो गाड़ी वनाग्नि की चपेट में आ गई थी। इस हादसे में चार वनकर्मियों की मृत्यु हो गई थी जबकि चार वनकर्मी झुलस गए थे। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन चारों वन कर्मियों को दो एयर एंबुलेंस से दिल्ली एम्स में भर्ती के लिये भेज दिया है, वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं पीके पात्रो, वन संरक्षक उत्तरी वृत्त कोको रोसे व डीएफओ सिविल सोयम अल्मोड़ा डीएस मर्ताेलिया को निलंबित कर दिया है।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं पीके पात्रो को वन मुख्यालय में अटैच किए जाने के बाद अब उनकी जगह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर धीरज पांडे को सीसीएफ कुमाऊं का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। सीएफ नार्थ पर कोको रोसे की जगह सीएफ वेस्टर्न सर्कल विनय भार्गव को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। निलंबित किए गए डीएफओ की जगह एएसएफ हेमचंद गहतोड़ी इस जिम्मेदारी को देखेंगे।
वही, इस मामले में शासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। दरअसल पिछले दोनों तबादले को लेकर जो आदेश जारी किए गए थे उसमें सीसीएफ वनाग्नि एवं आपदा के पद से निशांत वर्मा को हटाया गया। उन्हें नियोजन की जिम्मेदारी दी गई थी। निशांत वर्मा को इस पद से हटा तो दिया गया लेकिन किसी दूसरे अधिकारी को इस महत्वपूर्ण पद पर जिम्मेदारी नहीं दी गई।
सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार इतने संवेदनशील समय के दौरान तबादले की प्रक्रिया में इस बात पर विचार क्यों नहीं किया गया? स्थाई रूप से फॉरेस्ट फायर के लिए सीसीएफ की तैनाती क्यों नहीं की गई? अल्मोड़ा वनाग्नि में चार वन कर्मियों की जलकर मौत हो गई, इसके बाद से ही सरकार इस मामले में एक्शन लेते हुए बड़ी कार्रवाई का संदेश देना चाहती थी। यही कारण रहा की सरकार ने दो आईएफएस अधिकारियों को निलंबित करने में देरी नहीं की, साथ ही एक सीनियर अधिकारी को वन मुख्यालय अटैच कर दिया है।
मगर सवाल फिर भी सामने है। पिछले 3 माह से प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में इजाफा हो रहा है, फिर भी लापरवाही की गई।
चार वनकर्मियों की मौत पर प्रियंका गांधी ने जताया दुख
देहरादून। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तराखंड में वनाग्नि की घटना में मरने वाले चार वनकर्मियों की मौत पर दुःख जताया है। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया है कि वो पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करें, साथ ही उन्हें मुआवजा दिया जाए। प्रियंका गांधी ने अपने एक्स अकाउंट पर इस घटना का जिक्र किया है। साथ ही उन्होंने लिखा है कि पिछले कई महीने से उत्तराखंड के जंगल लगातार जल रहे हैं, सैकड़ों हेक्टेयर जंगल तबाह हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में भी जंगलों में जगह-जगह आग लगने की सूचनाएं हैं। एक स्टडी के मुताबिक, हिमालय क्षेत्र के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कई गुना
बढ़ोतरी हुई है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर हमारे हिमालय और पर्वतीय पर्यावरण पर हुआ है।
…बचाव दल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी चारों की मौत
देहरादून। बीते गुरुवार की शाम को बिनसर अभयारण्य में लगी जंगल की आग बुझाने पहुंचे वन विभाग के एक वन बीट अधिकारी, दो फायर वाचर समेत चार लोगों की जलकर मौत हो गई थी। जबकि चार अभी भी गंभीर हैं। उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। आग इतनी विकराल थी कि फायर वाचरों और पीआरडी के जवानों को इससे बचने का मौका तक नहीं मिला। वन विभाग के अधिकारियों को टीम के जंगल में फंसे होने की जानकारी मिली तो वन क्षेत्राधिकारी मनोज सनवाल और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तब तक चार लोगों की मौत हो चुकी थी।
मृतकों के नाम
वनाग्नि में वन बीट अधिकारी बिनसर रेंज त्रिलोक सिंह मेहता (40) पुत्र नारायण सिंह, निवासी उडलगांव बाड़ेछीना, दैनिक श्रमिक दीवान राम (35) पुत्र पदी राम निवासी ग्राम सौड़ा कपड़खान, फायर वाचर करन आर्या (21) पुत्र बिशन राम निवासी कफड़खान और पीआरडी जवान पूरन सिंह (50) पुत्र दीवान सिंह निवासी ग्राम कलौन की मौके पर ही मौत हो गई।
घायलों के नाम
फायर वाचर कृष्ण कुमार (21) पुत्र नारायण राम निवासी ग्राम भेटुली, पीआरडी जवान कुंदन सिंह नेगी (44) पुत्र प्रताप नेगी निवासी ग्राम खांखरी वाहन चालक भगवत सिंह भोज (38) पुत्र बची सिंह निवासी ग्राम भेटुली,दैनिक श्रमिक कैलाश भट्ट (54) पुत्र बद्रीदत्त भट्ट निवासी ग्राम धनेली, अल्मोड़ा गंभीर रूप से झुलस गए।
मौत का झोंका साबित हुई तेज हवा
अधिकारी-कर्मचारी देंगे एक-एक दिन का वेतन
देहरादून। विगत दिवस बिन्सर अभ्यारण में हुई भीषण अग्नि दुर्घटना में घायल 4 चन कर्मियों को चार एयर एम्बुलेंस के माध्यम से दिल्ली एम्स में शिफ्ट करा दिया गया है। इस दौरान कुमाऊँ के शीर्ष अधिकारी और प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) भी मौके पर रहे। वनाग्नि की सूचना पर बिन्सर गेट से चालक समेत कुल 8 वन कर्मी वनाग्नि नियंत्रण को बिन्सर अभ्यारण में गये। कुछ किमी बाद बिन्सर महादेव मंदिर के आगे 4 वन कर्मी वाहन से उतर गये, पहाड के नीचे वनाग्नि की स्थिति देखने लगे तभी अचानक तेज हवाओं के साथ नीचे से आती अग्नि की चपेट में आये इन चार वनकर्मियों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी। वाहन में सवार अन्य चार वन कर्मी कुछ मीटर ही आगे गये होगें वह भी वाहन से कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश में अग्नि की चपेट में आ गये और गम्भीर रूप से घायल हो गये। वन विभाग की और से कहा गया है कि विश्व प्रकृति निधि से मृतको को 3-3 लाख रूपये प्रदान किया जायेगा।
मृतको को दैवीय आपदा फड से भी अनुग्रह राशि प्रदान की जायेगी। वहीं, भारतीय वन सेवा के अधिकारियों ने भी एक एक दिन का वेतन देने की घोषणा की है। वाहन चालक संघ, वन आरक्षी संघ, सहायक कर्मचारी संघ, उप वन क्षेत्राधिकारी संगठन, वन क्षेत्राधिकारी संगठन व मिनिस्ट्रीरियल संघ ने भी एक-एक दिन का वेतन देने की सहमति दी है।



