अग्निवीर, बेरोजगारी, अंकिता हत्याकांड मुद्दा नहीं बन पायेः गोदियाल
लोकसभा चुनाव में कुछ कमियां रह गई हैं, जिसे भविष्य में दूर किया जाएगा

शहरी इलाकों में बढ़त रही, ग्रामीण क्षेत्र में हम अपनी पकड़ नहीं बना पाएः गणेश
देहरादून। उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पौड़ी से लोकसभा प्रत्याशी रहे गणेश गोदियाल ने बुधवार को राजीव भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में मतदाताओं का आभार प्रकट करते हुए कह कि कुश्ती में नाम रोशन करने वाली हरियाणा की बेटियों के साथ में अत्याचार और अग्निवीर जैसे मुद्दे पर भाजपा को बहुत कुछ गवांना पड़ा, उन्होंने कहा अगर पंजाब और हरियाणा में अग्निवीर योजना राज्य के मन माफिक नहीं थी, उसी का परिणाम है कि पंजाब में भी भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। ऐसे में लोकसभा चुनाव में आए परिणामों के बाद प्रदेश की जनता को भी मनन करना होगा। अगर अग्निवीर, बेरोजगारी, आंकिता भंडारी हत्याकांड, बिगड़ती कानून व्यवस्था इस चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाया, तो फिर लोगों को भी अब पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है। कांग्रेस के मुताबिक लोकसभा चुनाव में हमारे प्रचार की पहुंच सही रही, शहरी इलाकों में बढ़त रही, वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में हम अपनी पकड़ नहीं बना पाए। जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा है।
उन्होंने पौड़ी लोकसभा की जनता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा बहुत कम समय में जिस प्रकार गढ़वाल लोकसभा के लोगों ने अपार स्नेह दिया है उसके लिए वह पौड़ी की जनता का आभार व्यक्त करते हैं। गणेश गोदियाल ने कहा पौड़ी लोकसभा की जनता ने जो पूंजी उन्हें दी है, वह इस पूंजी को अपनी समृद्धि में हमेशा सहेज कर रखेंगे। उन्होंने गढ़वाल लोकसभा ही नहीं बल्कि पांचों लोकसभा सीटों के मतदाताओं का आभार व्यक्त किया है।
गणेश गोदियाल ने कहा इस लोकसभा चुनाव में कुछ कमियां रह गई हैं, जिसे भविष्य में दूर किया जाएगा। उन्होंने इस चुनाव में पार्टी ने क्या खोया क्या पाया जैसे विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा 2019 की अपेक्षा कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस चुनाव में हार के आंकड़ों के मार्जिन को आधा करने में कांग्रेस पार्टी सफल रही। उन्होंने इसे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की जीत बताया है। गोदियाल ने कहा हम बेटियों के साथ हुए अन्याय के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे थे, अंकिता भंडारी हत्याकांड अगर मुद्दा नहीं बन पाया तो फिर लोगों को भी पुनर्विचार करने की जरूरत है।




