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दुनिया के वो सात अजूबे जो हो गये हैं गायब

दुनिया के सात अजूबों के बारे में तो तुम जान ही चुके हो, पर क्या तुम ऑरिजिनल वंडर्स के बारे में भी कुछ जानते हो? ये वंडर्स आज के वंडर्स से काफी अलग थे। हालांकि इनमें से कई तो अब नहीं हैं, लेकिन इन महान कृतियों के बारे में तुम्हें जानकारी रखनी ही चाहिए। इनके बारे में तुम्हें विस्तार से बता रहे हैं संदीप जोशी

1. मिस्र के पिरामिड

बहुत हैरानी की बात है कि दुनिया के असली सात अजूबों में से सबसे पुराना अजूबा यानी मिस्र के पिरामिड आज तक अपनी जगह मौजूद हैं। बाकी सभी (इन्सान के बनाए हुए) अजूबे अब नष्ट हो चुके हैं। पिरामिडों का निर्माण करीब 5000 साल पहले हुआ था। असल में पिरामिड मकबरे हैं, जहां मिस्र के राजाओं (फेरोह) को मरने के बाद दफनाया गया है। इतिहासकार बताते हैं कि सबसे पुराने पिरामिड मिस्र में सक्कारा नाम की जगह पर मिले हैं, लेकिन गीजा के पिरामिड सबसे अधिक जाने जाते हैं। यहां इनमें आकार में एक सबसे बड़ा, दूसरा मध्यम और तीसरा सबसे छोटा है। इन्हें क्रमश: खुफू का पिरामिड, खफ्रे और मेन्कुरे के पिरामिडों के नाम से जाना जाता है। दरअसल खुफू के पिरामिड को ही प्राचीन विश्व के अजूबों में शामिल किया गया है। गीजा में कई अन्य पिरामिड भी बने थे। इनके निर्माण में हजारों मजदूरों ने काम किया था। वैसे नवंबर 2008 तक की गिनती के अनुसार, पिरामिडों की कुल संख्या 118 है।

2. हालिकार्नेसस का मकबरा

तुर्की के तटीय शहर बॉड्रम में यह मकबरा था। 2350 वर्ष पहले जब यह मकबरा बनाया गया था, तब इस शहर का नाम हालिकार्नेसस था। यह मकबरा 148 फीट ऊंचा था। यह मकबरा हालिकार्नेसस के राजा मॉसोलस के लिए बनाया गया था। मॉसोलस ने अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए हालिकार्नेसस को राजधानी बनाया था। समुद्र तट के एक किनारे पर उसने अपना महल बनवाया था, जिससे उसे समुद्र का नजारा साफ दिखता था। इसका कारण यह था कि वह किसी हमला करने वाले बाहरी आक्रमणकारी की नौसेना को भी साफ देख सकता था। साथ ही उसने लोगों के लिए भी कई मकान बनवाए और सुरक्षा के इंतजाम किए थे। कुछ समय बाद मॉसोलस की अचानक मौत हो गई, जिस कारण उसकी रानी आर्टेमीसिया ने यह विशाल मकबरा बनवाया था। यह मकबरा उस जमाने के किसी भी मंदिर जैसा लगता है और कई इतिहासकार कहते हैं कि इसे मॉसोलस ने अपने जीवनकाल में ही बनवाना शुरू कर दिया था। इस बारे में अभी तक कुछ पक्के तौर पर पता नहीं चल पाया है कि यह मकबरा नष्ट कैसे हुआ, लेकिन आठ सौ वर्ष पूर्व लिखी कुछ कविताओं में इसके बारे में बताया गया है, जिससे अंदाजा होता है कि कोई छह सौ वर्ष पूर्व आए भूकंप में यह नष्ट हुआ था।

3. ज़ीयस की मूर्ति

आज से लगभग 2500 साल पहले यूनान के ओलंपिया शहर में यूनानी देवताओं के ईश्वर ज़ीयस की एक बहुत बड़ी मूर्ति बनाई गई थी, जो 12 मीटर (43 फीट) लंबी थी। इस मूर्ति को यूनानी मूर्तिकार फिडियस ने बनाया था। जिस मंदिर में यह मूर्ति रखी गई थी, यह करीब उसकी छत तक लंबी थी। वह मंदिर भी ज़ीयस का था। यह हाथी दांत, सोने और हीरे-पन्नों से बनी थी। मूर्ति में ज़ीयस को एक कुर्सी पर बैठे दिखाया गया था, जिनके दाएं हाथ में विजय की देवी ‘नाइक’ की मुकुट पहने प्रतिमा और बाएं हाथ में राजदंड था। दूसरे अजूबों की तरह ज़ीयस की मूर्ति के नष्ट होने के बारे में कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। लेकिन इतिहासकारों का कहना है कि यह मूर्ति करीब आठ सौ साल तक मंदिर में रखी रही थी। बाद में इस मंदिर में आग लग गई थी, जिसमें मूर्ति के साथ पूरा मंदिर जल गया था। सन् 1954 के आसपास ओलंपिया शहर में जब इतिहासकारों ने खुदाई की तो उन्हें फिडियस की वर्कशॉप मिली थी, जहां से मिले औजारों पर लिखा हुआ था ‘फिडियस की संपत्ति’।

4. सिकंदरिया का लाइटहाउस

मिस्र के सिकंदरिया (एलेक्जांड्रिया) शहर के पास फारोस द्वीप में 2280-40 साल पहले समुद्र किनारे लाइटहाउस बनाया गया था। इसका काम रात में आने वाले समुद्री जहाजों को रास्ता दिखाना था। इसकी ऊंचाई 353 से 450 फीट थी। कई सालों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत भी थी। लाइटहाउस 29 मील दूर से दिखाई देता था। 1150 साल पहले आए भूकंप में लाइटहाउस को काफी नुकसान पहुंचा था, लेकिन फिर भी यह काम करता रहा था। उसके बाद करीब 700 वर्ष पहले आए दो भूकंप इतने तेज थे कि यह लाइटहाउस मलबे का ढेर बन गया। मशहूर यात्री इब्न बतूता जब सिकंदरिया पहुंचे तो उन्होंने लिखा कि मलबे के ढेर से वे लाइटहाउस के खंडहर में घुस ही नहीं सके थे। आज भी इसके खंडहरों को समुद्र में देखा जा सकता है।

5. बेबीलोनिया के झूलते बगीचे

ये बगीचे 2600 साल पहले बेबीलोन यानी आज के इराक में बनवाए गए थे। वहां के राजा ने इन चौकोर बगीचों का निर्माण अपनी रानी के लिए करवाया था, जो हरे-भरे बाग-बगीचों की याद में खोई रहती थी। इन बगीचों के पौधों में छिड़काव के लिए पानी लाना भी बहुत कठिन काम था। इसके लिए ‘स्क्रूपंप’ का इस्तेमाल किया गया था, जो आज तक खेती आदि करने में उपयोग होता है। पेड़-पौधों को हरा-भरा रखने के लिए पानी पास में बहने वाली नदी यूफ्रेटस से खींचा जाता था। यूनानी इतिहासकारों ने लिखा है कि ये बगीचे 100 फीट लंबे और 100 फीट चौड़े थे। बगीचों को बनाने में ईंट, तारकोल जैसी चीजों का भी इस्तेमाल हुआ था और पौधों को बहुत बड़ी जगह में उगाया गया था। 2200 बरस पहले भूकंप में ये बगीचे नष्ट हो गए थे।

6. आर्टमिस की देवी का मंदिर

यह मंदिर उसी जगह था, जहां आज तुर्की का सेल्कक शहर है। आर्टमिस देवी का नाम डायना भी है, इसलिए इसे डायना का मंदिर भी कहते थे। इसे 2500 वर्ष पहले बनाया गया था, जिसके बाद यह नौ सौ वर्षों तक खड़ा रहा। उस समय कई बार बाढ़ आई और छठी सदी में मंदिर नष्ट हो गया। कई बरस बाद मंदिर को फिर बनाने की कोशिश शुरू हुई और दस साल की मेहनत के बाद यह बनकर तैयार हुआ, लेकिन हीरोस्ट्रेटस नाम के एक लुटेरे ने मंदिर को लूटकर आग लगा दी और यह एक बार फिर से बर्बाद हो गया। इसके बाद एक बार फिर इसे बनाया गया था। सन् 1869 में सेल्कक शहर में इस मंदिर के अवशेष मिले थे। आज इसके खंडहरों के नाम पर मंदिर का एक स्तंभ ही खड़ा है।

7. रोड्स की प्रतिमा

यूनान के रोड्स द्वीप के रोड्स नाम के शहर में 2280 साल पहले एक बहुत बड़ी मूर्ति बनाई गई थी। यह मूर्ति 107 फीट ऊंची थी और समुद्र किनारे खड़ी थी। मूर्ति रोड्स की साइप्रस पर विजय की खुशी के अवसर पर बनाई गई थी। कहते हैं जब साइप्रस की सेना हार कर मैदान छोड़ गई थी तो उनके छोड़े हथियारों को गलाकर इस प्रतिमा के बनाने में इस्तेमाल किया गया था। प्रतिमा को मंद्राकी के समुद्र तट के किनारे चबूतरे पर खड़ा किया गया था। मूर्ति के पैरों को पत्थर और तांबे की प्लेटों से बनाया गया था। मूर्ति 56 वर्ष ही खड़ी रही। इसके बाद एक भूकंप में यह मूर्ति टूट गई थी।

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