भूमि कहती हैं कि हालांकि लोगों के पास इंटरनेट है, टीवी है, फोन भी है. लेकिन सोच से अब भी वह उसी दौर में जी रहे हैं. हमें इस कैरेक्टर के लिए काफी कुछ अलग करना पड़ा. इस फिल्म के लिए मैं काफी दिनों पहले ही चंबल पहुंच गयी थी. फिर मैं तीन चार किलोमीटर चलती थी. सिर पर बोरी होती थी. आटे या चावल की. वहां लोग पैदल कई किलोमीटर तक चल जाते हैं. भूमि ने बताया कि उन्होंने गोबर के उपले बनाये हैं. चूल्हा जला कर खाना बनाना भी सीखा. वहां सर्वाइव करना भी कठिन था.