शनि तप करने की प्रेरणा देते हैं

शनिदेव परम कल्याणकर्ता न्यायाधीश और जीव का परमहितैषी ग्रह माने जाते हैं। कहते हैं जन्म जन्मान्तर तपस्या के बाद अविद्या और माया से प्रभावित होकर जो लोग बुरे कर्म करने लगते हैं और तप पूर्ण नही कर पाते हैं, उनकी तपस्या को सफ़ल करने के लिये शनिदेव भावी जन्मों में पुन: तप करने की प्रेरणा देते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार द्रेष्काण कुन्डली मे जब शनि और चन्द्रमा एक दूसरे को देखते हैं तो व्‍यक्‍ति को उच्च कोटि का संत बना देते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि शनि पूर्व जन्म के तप को पूर्ण करने के लिये इंसान को ईश्‍वर की ओर प्रेरित करते हैं ताकि वर्तमान जन्म में उसकी तपस्या सफ़ल हो जाये।

ईश्‍वर के दर्शन का रास्‍ता बताते हैं

जिस पर भी शनि ग्रह अपनी कृपा द्रष्‍टि डालता है उसको पहले कष्‍टों से तपाता है आैर उसके बाद सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करतर है। यानि शनि का लक्ष्य दुख देना नहीं बल्कि कष्टों की भट्टी में तप कर सत्य की राह पर चलेन वाला कुंदन बनाना होता है। पदम पुराण में राजा दशरथ के माध्‍यम से बताया गया है कि शनि तप करने के लिये मनुष्‍य को जंगल तक पंहुचा देता है परंतु यदि वह तप में मग्‍न रह कर माया मोह में नहीं फंसता तो शनि उनकी सहायता करता है और सारे कष्‍टों को दूर करके प्रभु के दर्शन करा देता है। इसका उल्‍टा होने पर शनिदेव उन पर कुपित हो जाते हैं और समस्‍यायें खड़ी कर देते हैं।

इस वर्ष धनु राशि में हैं शनि

साल 2017 के 26 अक्टूबर को शनि ने धनु राशि में प्रवेश किया था आैर अभी भी उसी राशि में हैं। बस इस वर्ष 30 अप्रैल को सांय 5 बजकर 32 मिनट पर वे धनु राशि में ही मार्गी से वक्री हो जायेंगे। यह स्थित 18 सितंबर दोपहर तक रहेगी आैर उसके बाद 2 बज कर 25 मिनट पर वे धनु राशि में पुनः मार्गी हो जायेंगे। 2019 शनि ज्यादातर समय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेंगे और 27 दिसंबर 2019 को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। साथ ही 20 जनवरी 2019 तक शनि अस्त थे यानि उनका प्रभाव कम हो गया था। अब इस साल के अंत में 27 दिसंबर को वे पुनः अस्त होंगे जनवरी 2020 तक इसी स्थिति में रहेंगे। अब अगले साल 24 जनवरी 2020 को प्रात:काल 10 बज कर 03 मिनट पर वे परिवर्तन करके मकर राशि में प्रवेश करेंगे।