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इस वर्ष चैत्रनवरात्रि में अष्टमी की हानि, नवमी दो दिन, आयु के अनुसार करें कौमारी पूजन

अष्टमी तिथि की हानि दो होंगी नवमी
इस वर्ष चैत्रनवरात्रि में अष्टमी तिथि की हानि हो रही है जबकि नवमी दो दिन मनाई जाएगी। हिन्‍दू पंचांग के मुताबिक 13 अप्रैल को केवल सूर्योदय से लेकर सुबह कुछ देर तक ही अष्‍टमी है, इसके बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी। पंडित दीपक पांडे के अनुसार इस बार नवमी दो दिन यानी कि 13 अप्रैल और 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। नवमी तिथि 13 अप्रैल 2019 को सुबह 11 बज कर 42 मिनट से प्रारंभ हो जायेगी  और 14 अप्रैल 2019 को सुबह 09 बज कर 36 मिनट तक रहेगी। इसी के अनुसार आप को कन्या पूजन करना होगा।

दो से दस वर्ष तक की कन्या का करें पूजन

शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष से लेकर दस वर्ष की आयु तक की कन्या की नवरात्रि में पूजा करना और उन्हें भोजन कराना सर्वोत्तम माना जाता है।

दो वर्ष की कन्या कुमारी कहलाती है इनकी पूजा करके भोजन कराने से दुख दरिद्रता और शत्रुओं का नाश होता है, साथ ही आयु में भी वृध्दि होती है।

तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति कहते हैं और इसे पूजन करके भोग लगाने से आय में वृध्दि होती है, अपमृत्यु योग का नाश, दुखों से मुक्ति और धर्म की प्राप्ति होती है।

चार वर्ष की कन्या कल्याणी होती है जो धन धान्य, सुख में वृध्दि और संतान प्राप्ति का आर्शिवाद दिलाने वाली होती है।

पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है, इसकी पूजा करके आरोग्य, सुख समृध्दि और सम्मान की प्राप्ति की जा सकती है।

छह वर्ष की कन्या को कलिका कहते हैं ये विद्या, उच्च पद दिलाने के साथ शत्रुओं का नाश करने में सहायता करती है। युध्द और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए चंडिका कहलाने वाली सात वर्ष की कन्या का पूजन करें।

आठ वर्ष की कन्या का पूजन करने से दुख दारिद्रय का नाश होता है, उच्च अधिकारियों के सहयोग से सफलता मिलती है और पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। ये कन्या शांभवी कहलाती है।

नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा कहते हैं। इसकी पूजा करके भोजन कराने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और दुर्भाग्य का नाश होता है। जबकि दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कही जाती है, जिसके पूजन से सौभाग्य, धन धान्य की प्राप्ति, और मनोकामना की पूर्ति होती है।

महत्वपूर्ण है कौमारी पूजन
वैसे तो बहुत से माता के भक्त नवरात्रि के प्रत्येक दिन कन्या पूजा करके उनको भोजन कराते हैं, परंतु मुख्य रूप से कन्या पूजन और भोज कराने की परंपरा सप्तमी और अष्टमी को मानी जाती है। कन्या पूजन को कौमारी पूजा भी कहा जाता है। माना जाता है कि कन्याओं का पूजन करने से सुख समृध्दि प्राप्त होती है।

About एच बी संवाददाता

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