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कैबिनेट फैसला : हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ावा देने वाली योगी सरकार का महत्वपूर्ण फैसला, जानिए

लखनऊ । धर्म स्थलों के विकास और हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ावा देने वाली योगी सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला किया है। विंध्याचल, देवीपाटन और नैमिषारण्य के तीन प्रमुख शक्ति पीठों पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले अब स्थानीय निकायों की निगरानी में नहीं होंगे, बल्कि सरकार खुद इनकी देख-रेख करेगी। तीनों मेलों का प्रांतीयकरण किया गया है। कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है। नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सीतापुर जिले में मां ललिता देवी शक्तिपीठ, अमावस्या मेला, नैमिषारण्य, बलरामपुर जिले में मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ, देवीपाटन तुलसीपुर मेला और मीरजापुर जिले में मां विंध्यवासिनी शक्तिपीठ मेला का प्रांतीयकरण किया गया है। तीनों जिलों के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति इन मेलों का प्रबंधन करेगी।

तीनों मेलों का सरकारीकरण
मां ललिता देवी, विंध्यवासिनी जेवी, मां पाटेश्वरी मेलों पर आने वाला व्यय भार शासन द्वारा वहन किया जाएगा। नैमिषारण्य के लिए 60 लाख, देवीपाटन के लिए 48.44 लाख और विंध्याचल शक्तिपीठ मेले के लिए सरकार ने इस वर्ष 41.49 लाख रुपये का अनुदान दिया है। मां विंध्यवासिनी शक्तिपीठ मेले का आयोजन अभी विंध्य विकास परिषद एवं नौ कार्यदायी विभागों द्वारा मिलकर किया जाता है। अब इसका भी प्रबंधन जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा। सुरेश खन्ना ने कहा कि जिन मेलों का महत्व जिले से ऊपर प्रदेश स्तर का होता है, उनका प्रांतीयकरण किया जाता है। उसी अनुरूप अनुदान दिया जाता है। प्रांतीयकरण होने के बाद सरकार इन तीनों मेलों में श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेले के अन्तर्जनपदीय, अन्तर्राज्यीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप के दृष्टिगत इसकी समुचित व्यवस्था, सफल आयोजन और इसके प्रांतीयकरण की घोषणा की है।

इलाहाबाद के कुंभ मेले में चार स्थानों पर साधु संतों के लिए जन सुविधा केंद्र निर्मित होंगे। इस पर पांच करोड़ 50 लाख रुपये का खर्च होगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि कुंभ मेलाधिकारी ने अटल अखाड़ा, अरैल स्थित सच्चा बाबा आश्रम, अलोपी बाग स्थित ब्रह्म निवास श्रीशंकराचार्य आश्रम और अलोपी बाग मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और साधु संतों के ठहरने के लिए मूलभूत जनसुविधाओं के निर्माण के लिए प्रस्ताव दिया था जिसे मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज उप्र जलनिगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। यह भूमि अखाड़ा और आश्रमों की है। चूंकि यह साधु-संतों के लिए है अत: जनहित में निर्माण कार्य की स्वीकृति कैबिनेट ने दी है।

About एच बी संवाददाता

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