लखनऊ। हरियाणा के फरीदाबाद से तीन बार तथा मेरठ से एक बार सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना का भाजपा से मोहभंग हो गया है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मीरापुर से विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने आज भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के साथ ही विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। आज ही उनकी लखनऊ में प्रियंका गांधी वाड्रा तथ ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी है।

अवतार सिंह भड़ाना ने आज ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक पद और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया है। आज शाम को करीब चार बजे अवतार सिंह भड़ाना प्रियंका गांधी के सामने कांग्रेस में शामिल होंगे। अवतार सिंह भड़ाना को कांग्रेस से फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से ही चुनाव लडऩे का आश्वासन मिला है। भड़ाना कांग्रेस से तीन बार फरीदाबाद और एक बार मेरठ से लोकसभा सदस्य थे।

अवतार भड़ाना सबसे पहले राजस्थान के दौसा लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इसके बाद 1988 में देवीलाल ने हरियाणा मंत्रिमंडल में उनको बिना विधायक के मंत्री बनाया था। 1991 में अवतार भड़ाना पहली बार कांग्रेस की टिकट पर फरीदाबाद लोक सभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे।

अवतार सिंह भड़ाना ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी ताल ठोंक दी है। अवतार सिंह भड़ाना ने दावा किया है वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अवतार सिंह भड़ाना मंत्री बनने की चाहत में भाजपा में शामिल होकर मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट से विधायक बने। उनको जीत दर्ज करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी और बड़े कम अंतर से जीते थे।

भाजपा को झटका

अवतार सिंह भड़ाना का क्षेत्र में बड़ा रसूख है और गुर्जर बेल्ट में काफी अच्छी पकड़ भी है। कांग्रेस के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव अवतार सिंह भड़ाना ने फरीदाबाद से लड़ा था, तब उनके सामने भाजपा के कृष्णपाल गुर्जर विजयी हुए थे। कृष्णपाल गुर्जर पर भड़ाना हमेशा उंगली उठाते रहते हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के बीच कहा था कि फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में जनता मौजूदा जनप्रतिनिधियों से नाखुश है। अवतार भड़ाना ने कहा था कि केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से क्षेत्र की जनता खुश नहीं है।

31 साल की उम्र में बिना विधायक बने बन गए मंत्री

अवतार भड़ाना का राजनीतिक सफर शुरू तो कांग्रेस से हुआ था, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चर्चा में तब आए, जब 1988 में बिना विधायक ही तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने अपने मंत्रिमंडल में शहरी स्थानीय निकाय राज्य मंत्री बनाया था। चौधरी देवीलाल के पुत्र और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के विरोध के कारण छह माह बाद ही भड़ाना की मंत्रिमंडल से विदाई हो गई थी। इसके बाद भड़ाना कांग्रेस में शामिल हो गए और उसके बाद इनेलो में होते हुए अब भाजपा में हैं।र भड़ाना का राजनीतिक सफरनामा

1988- हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने अवतार भड़ाना को बिना विधायक छह माह के लिए शहरी स्थानीय निकाय राज्य मंत्री बनाया था।

1991- अवतार भड़ाना कांग्रेस की टिकट पर फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने।

1996- अवतार भड़ाना कांग्रेस की टिकट पर फरीदाबाद लोकसभा चुनाव में भाजपा के रामचंद्र बैंदा से चुनाव हार गए।

1998- मध्यावधि लोकसभा चुनाव में अवतार भड़ाना को कांग्रेस की टिकट नहीं मिली और वे जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़े तथा चुनाव हार गए, इस चुनाव में भी भाजपा के रामचंद्र बैंदा जीते।

1999- लोकसभा चुनाव में अवतार भड़ाना को कांग्रेस ने मेरठ लोकसभा क्षेत्र से टिकट दिया। यहां से भड़ाना चुनाव जीत गए।

2004- लोकसभा चुनाव में अवतार भड़ाना फिर से फरीदाबाद से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए।

2009- अवतार भड़ाना फरीदाबाद से लगातार दूसरी बार चुनाव जीते

2014- अवतार भड़ाना कांग्रेस की टिकट पर भाजपा के कृष्णपाल गुर्जर से 4.67 लाख वोट से चुनाव हार गए।

2014- हरियाणा विधानसभा चुनाव में अवतार भड़ाना इंडियन नेशनल लोकदल में शामिल हो गए। उन्होंने इनेलो के लिए स्टार प्रचारक के रूप में काम किया।

2015- दिल्ली विधानसभा चुनाव में अवतार भड़ाना इंडियन नेशनल लोकदल छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी ने इन्हें दिल्ली चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में उतारा।

2016- अवतार भड़ाना को भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया।

2017- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अवतार भड़ाना मीरापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए।