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कुंभ स्नान जन्म और मृत्यु के चक्र से दिलाता है मुक्ति

कुंभ मेला आस्था का पर्व है। श्रद्धालु पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर अपने पापों और जन्म मरण के चक्र से मुक्ति पाते हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पृथ्वी पर केवल कुंभ मेला एक ही ऐसी जगह है, जहां आप अपने पापों से मुक्त हो सकते हैं। जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पा सकते हो।

मान्यता है कि कुंभ के दिनों में पवित्र गंगा के जल में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। स्नान कर हर कोई नए वस्त्र धारण करता है और साधुओं के प्रवचन सुनता है। दो बड़े कुंभ मेलों के बीच एक अर्धकुंभ मेला भी लगता है। इस बार प्रयागराज में कुंभ मेला दरअसल, अर्धकुंभ ही है। संगम तट पर ही ऋषि भारद्वाज का आश्रम है, जहां भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ वनवास के समय आकर रुके थे। प्राचीनकाल में शंकराचार्य और चैतन्य महाप्रभु भी कुंभ दर्शन को गए थे।

कुंभ मेले में आने वाले नागा साधु सबके आकर्षण का केंद्र होते हैं। महाकुंभ, अर्धकुंभ या फिर सिंहस्थ कुंभ के बाद नागा साधुओं को देखना बहुत मुश्किल होता है। नागा साधु बनने के लिए 10 से 15 साल तक कठिन तप और ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। अपने गुरु को विश्वास दिलाना पड़ता है कि साधु बनने के लायक है। परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है।

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