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स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अंतिम दर्शन पर विवाद, एम्स ने नहीं दी इजाजत

ऋषिकेश : स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अंतिम दर्शन को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में खासा विवाद हुआ। एम्स प्रशासन ने साफ तौर पर कह दिया है कि सानंद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए नहीं रखा जाएगा। जिसके बाद उनके परिजन, अनुयायी और गंगा संकल्प यात्रा के सहयोगी नाराज हो गए। एम्स ने मातृ सदन की ओर से आए उनके शरीर को तीन दिन आश्रम में रखने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। हालांकि बाद में बिगड़ते हालात को देखते हुए एम्स प्रशासन ने मीडिया को छोड़कर कुछ लोगों को अंतिम दर्शन की इजाजत दे दी।

गंगा रक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग को लेकर तप कर रहे 86 वर्षीय स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (आइआइटी कानपुर के रिटायर्ड प्रो. जीडी अग्रवाल) का गुरुवार को ऋषिकेश एम्स में निधन हो गया। सानंद पिछले 113 दिनों से हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम में उपवास कर रहे थे।

बीती नौ अक्टूबर को उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया था, जिसके बाद दस अक्टूबर को हरिद्वार जिला प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती कराया था। स्वामी सानंद ने एम्स में भी अपना व्रत जारी रखा, जिसके चलते शुक्रवार को उनका पोटेशियम लेवल निम्न स्तर पर आ गया और हृदयघात से उनकी मौत हो गयी।

एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत ने शव को अंतिम दर्शन के लिए रखने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर अब एम्स की संपत्ति है, लिहाजा उसे सार्वजनिक रूप से अंतिम दर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता। एम्स प्रशासन के इस फैसले के बाद उनके परिजनों और अनुयायियों ने काफी मिन्नतें की। लेकिन एम्स निदेशक अपने फैसले से पीछे नहीं हटे और दोपहर एक बजे वहां से चलते बने।

About एच बी संवाददाता

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