Saturday , April 20 2019
Home / उत्तराखण्ड / मुशायरा व कवि सम्मेलन में शायरों ने आज के हालात पर कसेे तंज
PHOTO (5)

मुशायरा व कवि सम्मेलन में शायरों ने आज के हालात पर कसेे तंज

विकासनगर। ग्राम बैरागीवाला में सामाजिक संस्था ‘जन सेवा ट्रस्ट’् की ओर से ‘देहरादून हैडलाइन’ के तत्वाधान में एक मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन जन सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष कारी मौ. ताहिर ने किया और केदारावाला ग्राम प्रधान मौ. इमरान ने शम्मा रौशन कर कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
मुशायरा में उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश से आए शायर व कवियों ने अपने-अपने अंदाज में शायरी कर मौजूद जनता की वाह-वाही लूटी। यूपी से आए शायर डा. साबिर बेहटवी ने ‘वो लेकर डिगरियां ठेले पर सब्जियां बेचते हैं, हमारे मुल्क में ये हाल है नौ जवानों का…, पढ़ा। वहीं यूपी मेरठ जिले से आए शायर पफैसल मेरठी ने शिक्षा पर जोर देते हुए ‘पिफकरो अहसास की दुनिया को सजाना होगा, इल्म के दीप से यूं दीप जलाना होगा…पढ़ा। वहीं उत्तराखण्ड के मशहूर कवि महेंद्र सिंह निर्भीक ने ‘बलिदान से करते हैं रक्षा देश के सम्मान की, मुठ्ठी भर नहीं देंगे मिट्टी अपने हिन्दुस्तान की…कविता पाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन अब्दुल वहाब नूर ने किया। कार्यक्रम के आयोजक राशिद राही थे। मुशायर में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड से आए शायर एवं कवि मौलाना इद्रीस वासिल, पवन शर्मा, रईस अहमद पिफगार, पुष्पेंद्र त्यागी, सौहर जलालाबादी, अरविंद शर्मा मठियानी, मुजीब सिक्रोडवी, इमतियाज अली, अब्दुस्सलाम आदि ने शिरकत की।

About एच बी संवाददाता

Check Also

IMG_1931-001

आईएम्एस यूनिसन यूनिवर्सिटी में ‘रूरल इकनोमिक चैलेंजेस’ पर  राष्ट्रीय सम्मलेन

देहरादून | आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी में आज दो दिवसीय  राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्गाटन किया गया। सम्मलेन   ‘रूरल चैलेंजेस  इकोनॉमिक्स –  यूनियन बजट  की भूमिका  ‘ पर केंद्रित रहा । इस अवसर पर सहायकमहानिदेशक आईसीएआर डॉ कुसुमाकर शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं । इस अवसर पर डीन डॉ कल्याणी रणराजन डे चेयर रहीं और सम्मेलन के सह अध्यक्ष डॉ अजय के सिंह रहे|अतिथियों का स्वागत कुलाधिपति डॉ गुरदीप सिंह द्वारा किया गया वहीँ  डॉ कल्याणी रंगराजन ने कांफ्रेंस में भाग लेने के लियासबका आभार  व्यक्त  किया भारत भर से  इक्कीस विश्वविद्यालयों, कॉर्पोरेट और सिविल सेवकों से प्राप्त कुल 52 शोध पत्र  प्रस्तुत किए गए । इस अवसर पर बोलते हुए  मुख्य अतिथि डॉ कुसुमाकर शर्मा ने कहा, “सामाजिक नीतियां आर्थिक नीतियों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। भारत में आज के समय किसान होना बहुत आसान नहीं  है। सभी कारक अनुकूल परिस्थितियोंके खिलाफ बढ़ रहे हैं। मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है और वैकल्पिक कारक अधिक आकर्षक होते जा रहे हैं। भारत में कृषि विकास लोप हो गया है। हमने चयनित फसलों के लिए बहुत सी फसलों की अनदेखी की है।“ उन्होंने कई सर्वेक्षण और अध्ययन भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कृषि के राज्यवार परिदृश्य पर प्रकाश डाला। सत्र की शुरुआत  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *